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आश्रम के ख़िलाफ़ इल्ज़ामात की तहक़ीक़ात के लिए नए ऑफीसर

मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस (रिटायर्ड) टी एल विश्वानाथ को इंकुआयरी ऑफीसर मुक़र्रर किया है कि वो पुदुचेर्री के सिरी आर ओ बिन्दू आश्रम के ख़िलाफ़ जिन्सी और दीगर इल्ज़ामात का जायज़ा लें, क्योंकि जस्टिस पी आर रमन ने जिन्हें क़ब्लअज़ीं ये

मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस (रिटायर्ड) टी एल विश्वानाथ को इंकुआयरी ऑफीसर मुक़र्रर किया है कि वो पुदुचेर्री के सिरी आर ओ बिन्दू आश्रम के ख़िलाफ़ जिन्सी और दीगर इल्ज़ामात का जायज़ा लें, क्योंकि जस्टिस पी आर रमन ने जिन्हें क़ब्लअज़ीं ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, अपना काम जारी रखने में मुश्किल का इज़हार किया है।

जस्टिस के के ससी धरन ने 30 अगस्त को केरला हाईकोर्ट के साबिक़ जज जस्टिस (रिटायर्ड) रमन को इंकुआयरी ऑफीसर मुक़र्रर किया था। जस्टिस (र) रमन ने पहले ही 27 सितंबर को इबतिदाई इंकुआयरी अंजाम दी थी और अगली तहक़ीक़ात 23 अक्तूबर को तए की गई थी।

उन्हें एक नुमाइंदगी ओडेशा के 165 अफ़राद की दस्तख़त के साथ वसूल हुई, जिन्होंने बयान किया कि वो इस आश्रम के भक्त हैं और ज़ेरेनज़र मसाइल के ताल्लुक़ से कुछ मालूमात रखते हैं। इब्तिदा-ए-में ये तए हुआ था कि इंकुआयरी को आश्रम के मकीनों और मुक़ामी ऐम एल ए से मौसूला शिकायतों तक महिदूद रखा जाएगा, और इस तरह उसे अंदरून तीन माह मुकम्मल कर लिया जाएगा। जस्टिस से तरजीही तौर पर1 दिसंबर तक अदालत को रिपोर्ट देने की दरख़ास्त की गई है।

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