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आसाम तशद्दुद, मुक़ामी मुस्लमानों और बोडो क़बाईल में तसादुम का नतीजा

क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन ने कहा हीका आसाम में बोडो क़बाईल और बंगला देशी मुहाजिरीन के दरमयान तसादुम का नतीजा नहीं है बल्कि नहीं बल्कि उन मुक़ामात पर मुक़ीम मुस्लमानों के दरमयान झड़पों के नतीजा में तशद्दुद फूट पड़ा और इस रियासत में फूट पड़ने वाले होलनाक वाक़ियात की तहक़ीक़ात के लिए एक ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम तशकील देने की सिफ़ारिश की है।

क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन के सदर नशीन वजाहत हबीबउल्लाह ने पी टी आई से कहा कि इस कमीशन ने झड़पों के वाक़ियात पर अपनी रिपोर्ट वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह को पेश करदी है और गुज़िशता रोज़ उन (वज़ीर-ए-आज़म) की तरफ़ से दी गई दावत इफ़तार में भी शख़्सी तौर पर तवज्जु मबज़ूल की गई।

मिस्टर हबीबउल्लाह ने कहाकि वज़ीर-ए-आज़म ने मुझ से कहा कि उन्हें रिपोर्ट मौसूल होचुकी है। इस कमीशन ने कहा है कि इस मर्तबा ये तसादुम महिज़ चंद बंगला देशी ताजरीन के दाख़िला पर बोडो के साथ नहीं हुआ है बल्कि बोडो क़बाईल और वहां मुक़ीम मुस्लमानों के दरमयान हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है की बिलाशुबा हमेशा ही आसाम के बाअज़ इलाक़ों में दरअंदाज़ी होती रही है लेकिन बंगला देश से अचानक कोई बड़े पैमाने पर दरअंदाज़ी नहीं हुई कि इस मसले पर इस किस्म का होलनाक तसादुम होजाए।

अक़ल्लीयती कमीशन की रिपोर्ट ने कहा है की जब मुस्लमान गाँव‌ छोड़ चुके थे उन के घरों को लूट लिया गया और आग लगादी गई, जिस से ये मंसूबा का इशारा मिलता है कि वो (मुस्लमान) ख़ुद अपने गाँव‌ और घरों को दुबारा वापिस ना आएं। मिस्टर हबीबउल्लाह ने कहा कि कमीशन के अरकान ने आसाम के चीफ़ मिनिस्टर तरूण गोगोई के इलम में भी ये बात लाई है कि मुस्लमानों की सलामती को अगर यक़ीनी नहीं बनाया गया तो ख़तरा है कि वो मुस्तक़बिल में अस्करीयत पसंद बन जाऐंगे।

अक़ल्लीयती कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है की मुस्तक़बिल में इस बात का संगीन ख़तरा है कि मुल्क के बाक़ी हिस्सों से ताल्लुक़ रखने वाले अस्करीयत पसंद जिहादी तंज़ीमें बोडो कबायली इलाक़ा में मोहलिक असलाह सरबराह करेंगे चुनांचे इस हक़ीक़त को मद्द-ए-नज़र रखते हुए मसले का हल तलाश किया जाना चाहीए कि गुज़िशता 15 साल से बोडो अस्करीयत पसंद इस किस्म के वाक़ियात में मुलव्वीस रहे हैं ।

दौरा कननददा टीम अक़ल्लीयती कमीशन के अरकान सय्यद हमीद, मुशीर जी बी पांडा और क्युकि एन दारू वाला पर मुश्तमिल थी। उन्हों ने बोडोलैंड इलाक़ाई ख़ुद इख़तियार अज़ला कोकराझार, गोसाईन गाँव‌ और धोबरी का दौरा किया।

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