आज़ाद मैदान तशद्दुद: मज़ीद एक मुल्ज़िम की ज़मानत पर रिहाई

आज़ाद मैदान तशद्दुद: मज़ीद एक मुल्ज़िम की ज़मानत पर रिहाई
मुंबई, २६ अक्टूबर ( पी टी आई) बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज़ाद मैदान तशद्दुद वाक़ियात ( हिंसात्मक घटना) के एक और मुल्ज़िम को ये कह कर बरी कर दिया कि रैली में शिरकत करना कोई जुर्म नहीं है । इस तरह अकबर रौनक ख़ान वो चौथे शख़्स बन गए हैं जिन्हें अदाल

मुंबई, २६ अक्टूबर ( पी टी आई) बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज़ाद मैदान तशद्दुद वाक़ियात ( हिंसात्मक घटना) के एक और मुल्ज़िम को ये कह कर बरी कर दिया कि रैली में शिरकत करना कोई जुर्म नहीं है । इस तरह अकबर रौनक ख़ान वो चौथे शख़्स बन गए हैं जिन्हें अदालत ने ज़मानत पर रिहा कर दिया है ।

क़ब्लअज़ीं अमीन चौधरी उमर रहमान और नज़ीर सिद्दीक़ी को भी अदालत की जानिब से राहत दी जा चुकी है । अकबर रौनक ख़ान को 30,000 रुपय के शख़्सी मुचल्का पर रिहा किया गया है । अकबर रौनक ख़ान को कमर पर गोली लगी थी जिसका ज़ख़म हनूज़ मौजूद है ।

उन्होंने अपनी दरख़ास्त ज़मानत में इद्दिआ (प्रमाणित) किया कि वो आज़ाद मैदान में तशद्दुद के मुक़ाम पर सिर्फ ज़ख्मीयों की मदद करने की ग़रज़ से गए थे और रैली में शिरकत करना कोई जुर्म नहीं है । जस्टिस थिप्से ने अपने हुक्मनामा में वाज़िह तौर पर कहा कि तशद्दुद ( हिंसा) के वाक़ियात की तहक़ीक़ात के लिए अकबर ख़ान को तहवील ( हिरासत) में लेना ज़रूरी नहीं है ।

क़बल अज़ीं जस्टिस थिप्से ने जब दीगर तीन मुल्ज़िमान की दरखास्त ज़मानत को मंज़ूर किया था तो उस वक़्त भी यही इस्तिदलाल ( दलील) पेश किया था कि बादियुन्नज़र (पहली दृष्टी) में मुल्ज़िमीन क़त्ल या इक़दाम-ए-क़तल मुआमला में मुलव्वस नज़र नहीं आए ।

लिहाज़ा उन को तहवील में लेना मुनासिब नहीं है । याद रहे कि 11अगस्त 2012 को मुंबई के आज़ाद मैदान में बर्मा और आसाम में मुसलमानों के क़तल-ए-आम के ख़िलाफ़ बतौर-ए-एहतजाज एक रैली मुनज़्ज़म ( आयोजित) की गई थी ( हालाँकि उस वक़्त रमज़ान उल-मुबारक का महीना जारी था और कई मज़हबी हलक़ों से मुक़द्दस माह में रैली मुनाक़िद करने की मुख़ालिफ़त ( विरोध) की गई थी ) जो अचानक तशद्दुद ( मारपीट/ झगड़े) में बदल गई।

पुलिस ने लाठी चार्ज किया और फायरिंग भी की । बादअज़ां 63 अफ़राद की गिरफ़्तारी अमल में आई थी । तशद्दुद में दो अफ़राद हलाक और 52 अफ़राद बिशमोल ( जिसमें) 44 पुलिस अहलकार ज़ख़मी हुए थे । एहितजाजियों ने मीडीया और पुलिस को निशाना बनाया था । उनकी वैन ( Van) को नज़र-ए-आतिश कर ( जला) दिया था ।

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