Monday , December 18 2017

इंजीनियरिंग कॉलेजेस की फीस पर हुकूमत-ओ-कॉलेजेस इंतिज़ामीया में टकराव की सूरत-ए-हाल

इंजीनीयरिंग कॉलेजेस की सालाना फ़ीस के मसला पर हुकूमत और कॉलेजेस के इंतिज़ामीया में टकराव की सूरत-ए-हाल पैदा होचुकी है। हुकूमत मौजूदा फ़ीस को 31हज़ार से बढ़ा कर 35 हज़ार करने के लिए तैय्यार है ताहम कॉलेजेस इंतिज़ामीया मज़ीद इज़ाफ़ा

इंजीनीयरिंग कॉलेजेस की सालाना फ़ीस के मसला पर हुकूमत और कॉलेजेस के इंतिज़ामीया में टकराव की सूरत-ए-हाल पैदा होचुकी है। हुकूमत मौजूदा फ़ीस को 31हज़ार से बढ़ा कर 35 हज़ार करने के लिए तैय्यार है ताहम कॉलेजेस इंतिज़ामीया मज़ीद इज़ाफ़ा के लिए मुतालिबा कर रहा है।

हुकूमत की जानिब से सख़्त मौक़िफ़ इख़तियार किए जाने के बाद आज कई कॉलेजेस ने हुकूमत के मौक़िफ़ के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया वाज़िह रहे कि माहिरीन की कमेटी की सिफ़ारिश पर का बीनी ज़ेली कमेटी ने इंजीनियरिंग की सालाना फ़ीस को 31हज़ार से बढ़ा कर 35 हज़ार करने का फ़ैसला किया।

चीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी ने भी इस फ़ैसला को मंज़ूरी दे दी ताहम इंजीनीयरिंग कॉलेजेस की अक्सरीयत इस फ़ैसला को क़बूल करने तैय्यार नहीं है। इन का कहना है कि कॉलेजेस के अख़राजात इस कम फ़ीस के तहत मुकम्मल नहीं किए जा सकते।

बताया जाता है कि इजलास में इंजीनीयरिंग की फ़ीस को 35 हज़ार से मज़ीद इज़ाफ़ा ना करने का फ़ैसला किया गया और हुकूमत इस फ़ैसला पर क़ायम रहेगी। चीफ़ मिनिस्टर ने ओहदेदारों से कहा कि हुकूमत के फ़ैसला को क़बूल ना करने वाले कॉलेजेस के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए तैय्यार रहें।

फ़ैडरेशन आफ़ आंधरा प्रदेश मैनारीटी एजूकेशनल इंस्टी टयूशंस के जनरल सेक्रेटरी मिस्टर ज़फ़र जावेद ने हुकूमत के सख़्त गीर मौक़िफ़ पर अफ़सोस का इज़हार किया और कहा कि फ़ेडरेशन की जानिब से डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर से नुमाइंदगी की गई है कि फ़ीस में 25 फ़ीसद इज़ाफ़ा किया जाय जो कि एक साल केलिए हो।

इस तरह सालाना फ़ीस 40 हज़ार रुपये होगी जबकि हुकूमत दो साल के लिए सालाना 35 हज़ार रुपये फ़ीस मुक़र्रर करना चाहती है जो कॉलेजेस के लिए नाक़ाबिल-ए-क़बूल है। उन्हों ने बताया कि साबिक़ में ए ज़मुरा के तहत 31 हज़ार और बी ज़मुरा के तहत 95 हज़ार फ़ीस थी लेकिन हुकूमत अब दोनों ज़ुमरों के लिए यकसाँ (एक हि तरह की) फ़ीस मुक़र्रर कर रही है।

तालीमी इदारे यकसाँ (एक हि तरह की) फ़ीस केलिए तैय्यार हैं ताहम फ़ीस का ताय्युन कॉलेजेस के अख़राजात के मुताबिक़ होना चाहीए। हुकूमत फी कस 15 हज़ार रुपये मज़ीद कमी कर रही है। उन्हों ने कहा कि कम फ़ीस के ताय्युन से इंजीनीयरिंग की तालीम का मेयार ख़त्म होजाएगा और कई कॉलेजेस बंद हो सकते हैं।

उन्हों ने कहा कि गुज़श्ता तीन बरसों से फ़ीस पर नज़र-ए-सानी नहीं की गई। ज़फ़र जावेद ने कहा कि कॉलेजेस के अख़राजात में दिन बह दिन इज़ाफ़ा होरहा है। हुकूमत को चाहीए कि वो कॉलेजेस के इंतिज़ामीया से बातचीत करते हुए कोई काबिल-ए-क़बूल हल तलाश करे और अपने सख़्त गीर मौक़िफ़ को तर्क करदे।

उन्हों ने कहा कि फ़ैडरेशन हुकूमत से मुज़ाकरात के लिए तैय्यार है।

TOPPOPULARRECENT