इंजीनीयरिंग कॉलिजस और AICTE!

इंजीनीयरिंग कॉलिजस और AICTE!

एक तरफ़ इंजीनीयरिंग कॉलेजस में एक लाख 50 हज़ार नशिस्तें ख़ाली रहने की ख़बरें दिन रात अख़बारात में आरही हैं दूसरी तरफ़ ऑन इंडिया कौंसल फ़ार टकनीकल एजूकेशन का इताब भी अलग नाज़िल होरहा है । जनवरी 2012मैंने 120 कॉलेजस का मुआइना किया वार इस में 40 अनजीनरग कॉलिजों की मुस्लिमा हैसियत को बरख़ास्त कर के ये हुक्म जारी करदिया कि इस में कोई दाख़िला ना लें क्योंकि इन कॉलेजस में बुनियादी सहूलतें फ़राहम नहीं हैं ।

इस बार सिर्फ 680 कॉलेजस में ही दाख़िला केलिए कौंसलिंग होगी । दूसरी तरफ़ AICTE के इताब से बचने केलिए कॉलेजस ख़ुदबख़ुद बंद करने केलिए दरख़ास्त दे रहे हैं । इस साल 58 कॉलेजस ने अपने तौर पर दरख़ास्तें दाख़िल की है एक तरफ़ 40 कॉलेजस मैं दाख़िलों के अमल को रोका जा रहा है दूसरी तरफ़ कॉलिज इंतेज़ामीया बंद करने पर मजबूर है । इस के बावजूद नए 25 इंजीनीयरिंग कॉलेजस को क़ायम करने की इजाज़त दी जा रही है और बाअज़ कॉलेजस को AICTE ने बाज़ातबा नोटिस जारी की हैं कि वो अपनी नशिस्तों में इज़ाफ़ा ना करें ।

कॉलेज मैनेजमैंट एक तरफ़ नए कॉलेजस केलिए इजाज़त ले रहे हैं दूसरी तरफ़ AICTE पर इल्ज़ाम भी लगाते हैं कि वो अपने इख़्तयारात का जायज़ तरीक़ा से इस्तिमाल नहीं कररही है । जो कॉलेजस को बंद किया गया उस की फ़हरिस्त भी जारी की जायता कि इलम हो । पहले तो AICTE को चाहीए कि कॉलेजस को इजाज़त ना दें और अगर दें भी तो इस हिसाब से दें कि वो Balance हूँ। बंद कॉलेजस की जगह नए कॉलेजस आएं और हर साल तमाम कॉलेजस के तालीमी मयार की रिपोर्ट मंगवाईं ।

कॉलेजस में खाबिल‌ असातिज़ा का तक़र्रुर केलिए ज़ोर दें B.Tech/BE को M.Tech मैं दाख़िला लेने वाले तलबा-ए-पढ़ा रहे हैं बल्कि M.Tech मैं तलबा-ए-का इस्तिहसाल किया जा रहा है । इस से तालीमी मयार ख़राब होगा । यही वजह है कि इन कॉलिजस का रुख अच्छी कंपनीयां नहीं करतीं । इन का Campus Selectionनहीं होता । पर्चे ऑनलाइन लाने की वजह से भी कॉलेजस को मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है । हर कॉलिज मुकम्मल इनफ्रास्टक्चर नहीं रख सकता इस लिए दिन बदिन इंजीनीयरिंग का मयार गिरता जा रहा है और आने वाले कल में रुजहान ख़तन होकर फिर ग्रैजूएशन की तरफ़ बढ़ेगा

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