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इंडियन मुजाहिदीन मामले में बी जे पी- कांग्रेस की तू तू मैं मैं

कांग्रेस लीडर शकील अहमद के इस तबसेरे पर कि 2002 गुजरात फ़सादाद ही इंडियन मुजाहिदीन के क़ियाम का सबब बने थे जारी तनाज़ा शिद्दत इख़तियार करता जा रहा है और बी जे पी ने आज उन्हें तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि वोटों के लिए वो दहश्तगर्दी क

कांग्रेस लीडर शकील अहमद के इस तबसेरे पर कि 2002 गुजरात फ़सादाद ही इंडियन मुजाहिदीन के क़ियाम का सबब बने थे जारी तनाज़ा शिद्दत इख़तियार करता जा रहा है और बी जे पी ने आज उन्हें तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि वोटों के लिए वो दहश्तगर्दी का इस्तिमाल कररहे हैं।

बी जे पी ने ये जानना चाहा कि क्या राहुल गांधी और वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह भी शकील अहमद की राय से इत्तिफ़ाक़ करते हैं? शकील अहमद के तबसेरा की वज़ीर-ए-क़लीयती बहबूद रहमान ख़ान और कांग्रेस लीडर दिगविजय सिंह ने मुदाफ़अत की। उन्होंने आज इस तनाज़े के पसमंज़र में सदर कांग्रेस सोनिया गांधी से मुलाक़ात की। समझा जाता है कि उन्होंने अपना मौक़िफ़ पार्टी सदर के सामने वाज़िह किया। बी जे पी ने शकील अहमद पर इंडियन मुजाहिदीन के क़ियाम के ताल्लुक़ से एन आई ए के एहसासात से तवज्जे हटाने की कोशिश का इल्ज़ाम आइद किया। बी जे पी तर्जुमान ने कहा कि इस बयान का मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ क़ौम की तवज्जे एनआईए के एहसासात से हटाना है।

बी जे पी तर्जुमान शाहनवाज़ हुसैन ने शकील अहमद के तबसेरे पर तन्क़ीद करते हुए ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदों को बताया कि कांग्रेस दहशतगर्दी के नाम पर भी वोट हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस क़ाइदीन दहश्तगर्दी को तस्लीम कररहे हैं। एक और पार्टी तर्जुमान राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि कांग्रेस इंडियन मुजाहिदीन और दहशतगर्दी को क़ानूनी मुक़ाम देने की कोशिश कररही है। उन्होंने बताया कि ऐसे वक़्त जबकि मुल्क दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ लड़ाई में मसरूफ़ है कांग्रेस दहशतगर्दी की ताईद कररही है। उन्होंने कहा कि हम राहुल गांधी या वज़ीर-ए-आज़म से ये जानना चाहते हैं कि क्या वो शकील अहमद की राय से इत्तिफ़ाक़ करते हैं।

ऐसे वक़्त जबकि शकील अहमद को बी जे पी की तन्क़ीदों का सामना है वज़ीर-ए-अक़लियती उमूर रहमान ख़ान ने उनकी ताईद करते हुए कहा कि शकील अहमद ने सिर्फ़ एनआईए की चार्ज शीट का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि मसाइब-ओ-मुश्किलात से मुस्लमान दो-चार होचुके हैं। मुस्लमानों में बरहमी पाई जाती है और ग़म-ओ-ग़ुस्सा ऐन फ़ित्री अमर है। उन्होंने कहा कि गुजरात फ़सादाद पर मुस्लमानों में काफ़ी बरहमी थी। रहमान ख़ान ने हाल ही में मुस्लमानों के ख़िलाफ़ दहशतगर्दी के मुक़द्दमात की निगरानी के लिए ख़ुसूसी पैनल का मुतालिबा किया था जिस पर तनाज़ा खड़ा होगया था। उन्होंने कहा कि कई मुस्लमान इन फ़सादात से मुतास्सिर हुए हैं और उन्हें ग़लती से दहशतगर्दी से भी जोड़ा गया है। इस के साथ साथ उन्होंने ये भी कहा कि दो ग़लत बातें मिलकर सही नहीं होजाती और दहशतगर्दी को किसी सूरत में जायज़ क़रार नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि दहश्तगर्दी के कई पहलू हैं। पाकिस्तान और आई एस आई इस में मुलव्वस है।

हुकूमत को चाहिए कि वो दहशतगर्दी से इस अंदाज़ में निमटे कि समाज तक़सीम ना हो। दिग्विजय सिंह ने कहा कि शकील अहमद एक तजरुबेकार लीडर हैं और उन्होंने काफ़ी ग़ौर-ओ-फ़िक्र के बाद ही ये तबसेरा किया होगा। शकील अहमद ने इतवार को टविटर पर लिखा था कि गुजरात फ़सादात के बाद इंडियन मुजाहिदीन का क़ियाम अमल में आया। उन्होंने कहा कि एन आई ए ने ख़ुद अपनी चार्ज शीट में ये वाज़िह किया है। उन्होंने कहा कि इस हक़ीक़त के बावजूद बी जे पी और आर एस एस अपनी फ़िर्कावाराना सियासत से बाज़ नहीं आरही हैं।

कांग्रेस पार्टी तर्जुमान राज बब्बर ने भी शकील अहमद के बयान की ताईद करते हुए कहा कि वो एक दूर अंदेश शख़्स हैं। उन्होंने अवाम से ख़ाहिश की कि वो उन के बयान का हक़ीक़ी जायज़ा लें। शकील अहमद एक संजीदा और दूर अंदेश शख़्स हैं अगर ऐसा शख़्स कुछ कहता है तो उसके बयान का बारीकबीनी से जायज़ा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शकील अहमद ने पहले ही अपने बयान की वज़ाहत करदी है चुनांचे पार्टी को इस मुआमले में मज़ीद कुछ कहना नहीं है। बादअज़ां कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी शकील अहमद ने सदर सोनिया गांधी और वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह से मुलाक़ात के बाद उन्हें पार्टी की जानिब से तलब किए जाने की तरदीद की। उन्होंने दावा किया कि इस मुलाक़ात में जारी तनाज़ा का ज़िक्र भी नहीं हुआ। ये मुलाक़ात सिर्फ़ सयासी सूरत-ए-हाल पर तबादला-ए-ख़्याल के लिए हुई थी।

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