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इंतिख़ाबी मुहीम‌ की तल्ख़ियों का दौर ख़त्म: मोदी

इंतिख़ाबी मुहीम में एक दूसरे पर तन्क़ीदें और कीचड़ उछालने का वक़्त ख़त्म होगया है, बी जे पी के वज़ारत-ए-उज़मा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंतिख़ाबी मुहीम के दौरान जो हुआ सौ हुआ लेकिन अब हमें एक दूसरे से जुड़ जाना चाहिए। अवाम का

इंतिख़ाबी मुहीम में एक दूसरे पर तन्क़ीदें और कीचड़ उछालने का वक़्त ख़त्म होगया है, बी जे पी के वज़ारत-ए-उज़मा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंतिख़ाबी मुहीम के दौरान जो हुआ सौ हुआ लेकिन अब हमें एक दूसरे से जुड़ जाना चाहिए। अवाम का दर्जा सियासत से ऊपर है।

मायूसी को उम्मीदों से बदलने, ज़ख़मों को मरहम से बदलने, ना चाहे जाने को चाहे जाने और ख़ारिज करने को शामिल करने से तबदील किए जाने की ज़रूरत है। ये एक फ़ित्री बात थी कि इंतिख़ाबी मुहीम के दौरान हर सियासी पार्टी ने सिर्फ़ अपने लिए मुहीम चलाई।

एक दूसरे पर इल्ज़ाम तराशी की, तन्क़ीदें कीं और कीचड़ भी उछाला , लेकिन अब वक़्त आगया है कि इस दौर को फ़रामोश कर दिया जाये। इंतिख़ाबात मुकम्मल होचुके हैं और अब हमें एक दूसरे से जुड़ जाने की ज़रूरत है। उन्होंने अपने ब्लॉग पर तहरीर करते हुए ये बात कही। उन्होंने एतराफ़ किया कि हालिया इख़तताम पज़ीर इंतिख़ाबात बहुत ही सख़्त मुक़ाबले से हैं लेकिन अब वो सब नहीं चलेगा।

16 मई को कौन जीतेगा, कौन हारेगा, लेकिन हिंदुस्तान की करोड़ों अवाम के ख़ाब चकनाचूर नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख़्तलिफ़ सियासी जमातों के नज़रियात मुख़्तलिफ़ होसकते हैं लेकिन मक़सद सब का एक है और वो है हिंदुस्तान के लिए काम करते हुए मुल्क के नौजवानों के ख़ाबों की पूरा करने का है।

उन्होंने इस बात पर खुशी का इज़हार किया कि एन डी ए अपने एजंडा पर अमल पैरा रहा। इंतिख़ाबात मुद्दाओं की बुनियाद पर लड़े जाते हैं और इसी तरह एन डी ए ने अपने मुद्दाओं का एजंडा कुछ इस अंदाज़ से तैयार किया कि अवाम को पार्टीयों के इंतिख़ाब में आसानी हुई। ऐसी पार्टीयां जो एन डी ए का हिस्सा हैं।

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