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इंतेजार को जमानत मिलते ही मुहल्ले में जश्न

रांची: जस्टिस अनंत विजय सिंह की अदालत ने जुमेरात को इंतेजार अली की जमानत की दरख्वास्त मंजूर कर ली। उसे 10-10 हजार के दो मुचलके पर जमानत पर छोड़ने का हुक्म दिया। वक़्त पर रिलीज अॉर्डर बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल नहीं पहुंच पाने की वजह से इंतेजार जेल से नहीं निकल सके। जेल इंतेजामिया काे रिलीज अॉर्डर मिलने के बाद आज 57 दिन के बाद जेल से बाहर आयेंगे। गौरतलब है कि 20 अगस्त को आर्मी इंटेलिजेंस, रांची पुलिस और जीआरपी ने धमाके खेज आलात रखने के इल्ज़ाम में इंतेजार अली को वर्द्धमान-हटिया पैसेंजर ट्रेन से गिरफ्तार किया था।

जुमेरात को सुनवाई के दौरान इंचार्ज पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने अदालत में कहा कि पुलिस के एफआइआर में जिक्र है कि इंतेजार के पास से दो बैग बरामद हुए थे, जबकि सीआइडी तहक़ीक़ात से पता चला कि बैग इंतेजार के पास से नहीं मिला था, बल्कि जिस सीट पर वह बैठा था, उसके ऊपर के रैक में था। बोगी में अौर भी कई मुसाफिर थे। इंतेजार के वकील विवेक कुमार सिंह ने अदालत से कहा कि इंतेजार के खिलाफ मजबूत सुबूत नहीं है। दाेनाें फिरीकों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने इंतेजार अली की जमानत की दरख्वास्त कुबूल कर ली। मामले की सुनवाई के वक्त अदालत में बड़ी तादाद में वकील अौर दीगर लोग मौजूद थे। इंतज़ार के कुछ रिश्तेदार भी अदालत में मौजूद थे।

इंतज़ार की बीवी रेहाना खातून ने कहा कि बकरीद गम में बीता, लेकिन मुहर्रम सामने है। वह मुहर्रम में शौहर के साथ रहेंगी. रेहाना ने रियासती हुकूमत , अक़लियत कमीशर और दीगर अखबारों ने काफी मदद की। रेहाना के मुताबिक बड़ी बेटी गुड़िया व बेटा अरमान समझदार हैं। वह दोनों को समझा लेती थी, लेकिन छोटी बेटी ब्यूटी जब पूछती थी अम्मी पापा कब आयेंगे, तो उसे दिलासा देकर हम बेबसी की आंसू रोते थे। दो माह कैसे बीता, यह सिर्फ हम ही समझ सकते हैं। अहले खाना को इक़्तेसादी परेशानियों से भी गुजरना पड़ा। इस हालत में ननद व बहनोई समेत पूरे अहले खाना ने हमें सहारा दिया़।

इंतेजार को जमानत मिलने की इत्तिला पर कई रिश्तेदार उनके घर पहुंचे थे। रेहाना मौजूदा में इंतेजार की बड़ी बहन शकीला खातून के घर में रह रही थी़। बड़े बहनोई मुबारक हुसैन, छोटी बहन हाजरा खातून, बहनोई मो निजामुद्दीन, भांजा मो अनवर हुसैन, साला सरजात हुसैन समेत मुहल्ले के लोग इस्तकबाल की तैयारी में लगे हुए है़ं।

 

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