इजरायल और यूएई में शांति समझौता, डोनाल्ड ट्रंप ने की मध्यस्थता

इजरायल और यूएई में शांति समझौता, डोनाल्ड ट्रंप ने की मध्यस्थता

इजरायल और यूएई ने सालों से चली आ रही दुश्मनी को भुलाकर ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत किया है। इस डील को मुकाम तक पहुंचाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समझौते के बाद यूएई और इजरायल के बीच राजनयिक संबंधो की नई शुरुआत भी होगी।

ट्रंप ने समझौते में निभाई अहम भूमिका
वाइट हाउस ने जानकारी दी है कि इस समझौते के कारण इजरायल ने वेस्ट बैंक इलाके में कब्जा करने की योजना को टाल दिया है। बताया गया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद और डोनाल्ड ट्रंप के बीच गुरुवार को फोन पर हुई चर्चा के बाद इस समझौते की मंजूरी दी गई है।

इन क्षेत्रों में साथ काम करेंगे इजरायल और यूएई
बयान में कहा गया है कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधिमंडल आने वाले हफ्तों में निवेश, पर्यटन, सीधी उड़ान, सुरक्षा, दूरसंचार और अन्य मुद्दों पर द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। दोनों देशों से जल्द ही राजदूतों और दूतावासों के आदान-प्रदान की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा दोनों देश अबुधाबी से तेल अवीव तक फ्लाइट की शुरुआत भी करेंगे। जिससे यूएई के मुसलमान यरुशलम के ओल्ड सिटी में अल-अक्सा मस्जिद जा सकेंगे।

कोरोना वैक्सीन के लिए भी साथ काम करेंगे दोनों देश
इजरायल और यूएई कोरोना वायरस की वैक्सीन के क्षेत्र में भी मिलकर काम करेंगे। वहीं इजरायल वेस्ट बैंक इलाके में कब्जे की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएगा। अमेरिका ने कहा है कि यह ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति को आगे बढ़ाएगी।

शांति समझौते में अमेरिका के ये अधिकारी रहे सक्रिय
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुश्नर, इजरायल में अमेरिकी राजदूत डेविड फ्रीडमैन और मध्य पूर्व के दूत एवी बर्कोविट्ज इस समझौते को पूरा कराने के पीछे दिन रात एक किए हुए थे। इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन भी दोनों देशों से लगातार बातचीत कर रहे थे।

इजरायल-यूएई डील का क्या होगा असर
इजरायल और यूएई के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते से दुनियाभर के मुस्लिम देशों में न केवल इजरायल की स्वीकार्यता बढ़ेगी। बल्कि, इजरायल की सुरक्षा और स्थिरता को भी इससे लाभ पहुंचेगा। मध्य-पूर्व के देशों के साथ इजरायल बहुत पहले से संबंधों को सुधारने के लिए काम कर रहा था। इस समझौते से ईरान, चीन और पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है क्योंकि ईरान और पाकिस्तान ने सीधे तौर पर ईजरायल को न तो मान्यता दी है और न ही कोई राजनयिक संबंध रखे हैं। वहीं, चीन को झटका इसलिए है क्योंकि मध्यपूर्व के देशों में उसकी मजबूत होती पकड़ को तगड़ा झटका लगा है।

सऊदी के साथ संबंध सुधार रहा इजरायल
इजरायल और सऊदी के बीच हाल के कुछ साल में द्विपक्षीय संबंध बेहतर हुए हैं। सऊदी अरब और इजरायल दोनों ईरान के परमाणु हथियार बनाने का विरोध करते हैं। इसके अलावा ये दोनों देश यमन, सीरिया, इराक और लेबनान में ईरान की आकांक्षाओं के विस्तार को लेकर भी चिंतित हैं। हिजबुल्लाह को लेकर भी इजरायल और सऊदी एक रुख रखते हैं। माना जा रहा है कि सऊदी और इजरायल खुफिया जानकारी, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। वहीं इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख अपने सऊदी समकक्षों और अन्य सऊदी नेताओं के साथ गुप्त रूप से मिलते रहे हैं।

साभार- नवभारत

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