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इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी पर हमले, पी एम ओ की ख़ामोशी पर तशवीश

सरकरदा शहरियों और सियोल सोसाइटी के अरकान ने मुसन्निफ़ीन और माहिरीन तालीम की आज़ादी तक़रीर पर हालिया हमलों के बारे में वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर की ख़ामोशी पर सवालात उठाए हैं। इन शहरीयों ने मुशतर्का बयान में कहा कि गुज़िश्ता 15 दिन के दौरान

सरकरदा शहरियों और सियोल सोसाइटी के अरकान ने मुसन्निफ़ीन और माहिरीन तालीम की आज़ादी तक़रीर पर हालिया हमलों के बारे में वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर की ख़ामोशी पर सवालात उठाए हैं। इन शहरीयों ने मुशतर्का बयान में कहा कि गुज़िश्ता 15 दिन के दौरान आज़ादी तक़रीर और इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी के हक़ पर मुतवातिर हमले हुए हैं।

जो लोग हालिया इंतेख़ाबी नताइज के बारे में अपनी इन्फ़िरादी राय रखते हैं उन्हें निशाना बनाया गया। बयान में कहा गया कि पुणे में बेक़सूर आई टी प्रोफ़ैशनल की बेदर्दी से हलाकत और इस के बाद लूट मार और तशद्दुद का वाक़िया अदम रवादारी और जम्हुरियत को लाहक़ ख़तरे की वाज़िह मिसाल है।

इस सिलसिले को फ़ौरी रोका जाना चाहिए। ईसी नौईयत के दीगर वाक़ियात की मिसाल देते हुए बयान में कहा गया कि गुज़िश्ता माह कनड़ी मुसन्निफ़ यू आर अनंता मूर्ती को कराची का यकरुख़ी टिकट रवाना किया गया। इस के अलावा फ़ोन पर उन्हें धमकियां भी दी गईं क्योंकि उन्होंने ये कहा था कि जिस मुल्क में मोदी इक़्तेदार पर हो वो वहां रहना नहीं चाहते।

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