Thursday , June 21 2018

इत्तिबा सून्न्त‌ हर मुसल्मान पर फ़र्ज़

हैदराबाद।फ़ित्ना-ओ-फ़साद ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद और बुराईयों के दौर में सुन्नत‌ को ज़िंदा करने का अज्र सौ शहीदों की शहादत के बराबर है, क्योंकि शहीद तो एक बार अल्लाह की राह में ज़ख़म खाकर जान दे देता है लेकिन सुन्न‌तों पर अमल करने वाले उम्र भर

हैदराबाद।फ़ित्ना-ओ-फ़साद ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद और बुराईयों के दौर में सुन्नत‌ को ज़िंदा करने का अज्र सौ शहीदों की शहादत के बराबर है, क्योंकि शहीद तो एक बार अल्लाह की राह में ज़ख़म खाकर जान दे देता है लेकिन सुन्न‌तों पर अमल करने वाले उम्र भर लोगों के ताने सुन्ते रहते हैं और अल्लाह के रसूल की ख़ातिर सब कुछ बर्दाश्त कर लेते हैं।

इस लिए उन के सुन्न‌त पर अमल पैरा होने का अज्र सौ शहीदों के बराबर रखा गया है लिहाज़ा हर इंसान क़दम क़दम पर रसूल अकरम स.व. की सुन्नत को थाम कर सो शहीदों का सवाब हासिल कर सकता है।

इन ख़्यालात का इज़हार जामीअत उलमोमीनात मूग़लपूरा मैं मुनाक़िदा दीनी इज्तेमा में हाफ़िज़ मुहम्मद साबिर पाशाह कादरी ने किया। निगरानी मौलाना मस्तान अली कादरी ने की।

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