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इत्तेहाद और तवक्कुल – मोमिन के लिए कामयाबी की ज़मानत

नई दिल्ली: शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़क्किर मिल्लत मौलाना डाँक्टर मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने नमाज़-ए-जुमा से क़बल ख़िताब में कहा कि इत्तिहाद और अल्लाह पर भरोसे ये दोनों अमल हर मोमिन की कामयाबी की ज़मानत हैं। इन्फ़िरादी और इजतिमाई फ़लाह-ओ-बहबूद इन्ही दो बातों पर मुनहसिर है।

क़ुरआन-ए-करीम में भी इसकी बहुत ताकीद है और रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अमली तौर पर भी इस की ताकीद फ़रमाई है। ये दो सिफ़ात हैं जिनकी वजह से उम्मत को कामयाबी मिली और आइन्दा भी मिलेगी। हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है कि अल्लाह ताला के इन अहकाम पर सख़्ती से अमल करके फ़लाहत दारीन हासिल करें।

शाही इमाम ने पठानकोट सूबा पंजाब में एय‌र बेस पर दहशत हमले की शदीद मज़म्मत की और उसे दोनों मुल्कों के ख़िलाफ़ साज़िश से ताबीर किया। इन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान की आर्मी ने उसे नाकाम बनादिया, ये इतमीनान की बात है। दहशतगर्दी की शदीद मज़म्मत होनी चाहिए, ये ग़ैर इन्सानी ग़ैर इस्लामी ज़ालिमाना फे़अल है जिसकी हर तरफ़ मज़म्मत होनी चाहिए।

पिछले दिनों हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के माबैन ताल्लुक़ात हमवार होते देखकर कुछ लोगों ने इस साज़िश को रचा था आइन्दा ऐसी साज़िश कामयाब ना हो उसके लिए चौकन्ना रहने की ज़रूरत है। हमें ख़ुशी है कि हिन्दुस्तान ने संजीदगी का मुज़ाहरा किया। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म ने कार्य‌वाई का यक़ीन दिलाया ये ख़ुश आइंद है।

मुज़ाकरात में कोई ख़लल ना पड़े तो इस से ये नापाक साज़िश बिलकुल ही नाकाम हो जाएगी। शाही इमाम ने पिछले दिनों सऊदी अरब हुकूमत की तरफ़ से 47 उल्मा-ओ-दीगर अफ़राद को इजतिमाई फांसी पर पैदा होने वाली सूरत-ए-हाल पर अफ़सोस का इज़हार किया। इन्होंने कहा कि इन हालात में सऊदी हुकूमत के इस इक़दाम को दानिशमंदाना नहीं कहा जा सकता।

दूसरी तरफ़ तहरान में सऊदी सिफ़ारत ख़ाने पर हमले भी अफ़सोसनाक है जिसकी मज़म्मत होनी चाहिए। हमारी दुआ है कि दोनों मुल्कों के दरमियान हालात मामूल पर आजाऐं और गुफ़्त-ओ-शनीद से मसाइल हल हो। सऊदी और ईरान को सिफ़ारती ताल्लुक़ात हमवार करने की भी कोशिश करनी चाहिए।

मुत्तहदा अरब इमारात, क़तर, सूडान, बहरीन, कुवैत वग़ैरा ने भी इस्लामी जम्हूरिया ईरान से सिफ़ारती ताल्लुक़ात मुनक़ते करलिए इस से ख़ित्ता में बदअमनी पैदा होने से सीहोनी हुकूमत को ख़ुशी हो रही है नीज़ ख़ुद-साख़्ता इस्लामी तन्ज़ीमों को भी छूट मिल रही है। ख़तरा ये है कि हालात बेक़ाबू ना होजाएं। अरब और अजम में इस्लामी उख़ोत का जो दरस पैग़ंबर इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दिया है वो हमारे लिए मिसाल-ए-राह है।

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