इन्हितात पज़ीर रुपये की क़दर पर अपोज़िशन की हुकूमत पर सख़्त तन्क़ीद

इन्हितात पज़ीर रुपये की क़दर पर अपोज़िशन की हुकूमत पर सख़्त तन्क़ीद
हुकूमत की ग़लत मआशी पालिसीयों की मज़म्मत, दायां और बाएं बाज़ू अपोज़ीशन तन्क़ीद में मुत्तहिद

हुकूमत की ग़लत मआशी पालिसीयों की मज़म्मत, दायां और बाएं बाज़ू अपोज़ीशन तन्क़ीद में मुत्तहिद
सियासी पार्टीयों ने लोक सभा में रुपये की क़दर में इन्हितात और इस के अमरीकी डालर के मुक़ाबिल 68 रुपये की हद पार कर लेने पर सख़्त तन्क़ीद की और मुतालिबा किया कि वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह इस मसले पर ऐवान में बयान दें। जब लोक सभा का इजलास शुरू हुआ तो क़ाइद अपोज़ीशन सुषमा स्वराज ने स्पीकर मीरा कुमारी से कहा कि वक़फ़ा सिफ़र के दौरान रुपये की क़दर में मुसलसल इन्हितात पर तक़रीर की इजाज़त दी जाये। उन्होंने कहा कि मुल्क का वक़ार रुपये की क़दर से वाबस्ता है।

हम चाहते हैं कि वज़ीर-ए-आज़म इस बारे में बयान दें जो एक मशहूर माहिर मआशियात हैं। जो अफ़राद मआशियात में पी एच डी करचुके हैं वो भी इस सूरत-ए-हाल से निमटने से क़ासिर हैं। उन्होंने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म को वज़ाहत करनी चाहीए कि रुपये की क़दर में इन्हितात रुक जाएगा या जारी रहेगा। समाजवादी पार्टी के सरबराह मुलाय‌म सिंह यादव ने रुपये की क़दर में इन्हितात का हुकूमत को ज़िम्मेदार क़रार दिया और कहा कि एक मुद्दत में रुपये की क़दर में इन्हितात क़ाबिल-ए-फ़हम है लेकिन मौजूदा इन्हितात मुसलसल है।

उसकी वजह हुकूमत की ग़लत पोलिसीयां और जारीये साल का बजट है जो इन पोलिसीयों के मुतज़ाद है। उन्होंने कहा कि 1991 में हिन्दुस्तान ने अपना सोना रहन रखा था और आज दुनिया दुबारा हिन्दुस्तान के सोने पर नज़रें जमाए हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय जिन्होंने रुपय की क़दर में इन्हितात पर मुबाहिस की तहरीक अलतवा पेश की थी, कहा कि रुपये की क़दर में मुसलसल इन्हितात, क़ौमी और बैन-उल-अक़वामी सतह पर फ़िक्रमंदी पैदा कररहा है। उन्होंने कहा कि मर्कज़ी वज़ीर फाईनानस ने मईशत की बेहतरी केलिए 10 इक़दामात की फ़हरिस्त पेश की है लेकिन इसका कोई तज़किरा रुपय की क़दर में इन्हितात को रोकने के लिए नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि ग़िज़ाई तमानीयत बिल की मंज़ूरी से अंदेशे पैदा होगए हैं कि मालीयाती ख़सारे में मज़ीद इज़ाफ़ा होगा। जनतादल (यू) के सदर शरद यादव ने कहा कि रुपये की क़दर में इन्हितात के नतीजे में सोवीयत यूनीयन मुंतशिर होगया था। हर माह हुकूमत कहती है की सूरत-ए-हाल बेहतर होगी लेकिन मुल्क ग़र्क़ होता जा रहा है। वज़ीर-ए-आज़म की उसकी वज़ाहत करनी चाहीए। सी पी आई ऐम के बासू देव आचार्य ने कहा कि हुकूमत की फ़िराक़ दिल मआशी पालिसी इस बोहरान की वजह है।

तेलुगुदेशम के निम्मो नागेश्वर राव‌ और बी एस पी के दारा सिंह चौहान ने भी वज़ीर-ए-आज़म से बयान का मुतालिबा किया। मर्कज़ी वज़ीर फाईनानस पी चिदम़्बरम के मईशत के क़ाबू में होने के दावे को बकवास क़रार देते हुए बी जे पी ने कहा कि हुकूमत को इख़तिलाफ़ात फ़रामोश करते हुए इस सूरत-ए-हाल से निमटने की पोलिसी तैय्यार करनी चाहीए।

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