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इमरान खान की पार्टी को बोहरान का सामना

लाहौर 8 जून, (एजेंसी) हालिया इंतिख़ाबात में अपनी ख़ाहिश के मुताबिक़ नताइज हासिल ना कर सकने वाली और शदीद ग्रुप बंदी की शिकार पाकिस्तान तहिरीक-ए-इंसाफ़ में दाख़िली इख़तिलाफ़ात सर उठाते नज़र आ रहे हैं।

लाहौर 8 जून, (एजेंसी) हालिया इंतिख़ाबात में अपनी ख़ाहिश के मुताबिक़ नताइज हासिल ना कर सकने वाली और शदीद ग्रुप बंदी की शिकार पाकिस्तान तहिरीक-ए-इंसाफ़ में दाख़िली इख़तिलाफ़ात सर उठाते नज़र आ रहे हैं।

पार्टी की एक बानी रुक्न और शोबा-ए-ख़वातीन की साबिक़ सरबराह फौज़िया क़सूरी के अपनी साथीयों समेत पार्टी छोड़ने के हालिया फ़ैसले के बाद तहिरीक-ए-इंसाफ़ का अंदरूनी बोहरान बज़ाहिर संगीन सूरत-ए-हाल इख़तियार कर गया है। पार्टी सरबराह इमरान ख़ान की बिस्तरे अलालत से की गई अपील भी इस बोहरान को ख़त्म नहीं कर सकी।

अठारह साला रिफ़ाक़त के बाद पार्टी को ख़ुदा हाफ़िज़ कहने वाली फौज़िया क़सूरी ने पाकिस्तान तहिरीक-ए-इंसाफ़ पर संगीन इल्ज़ामात आइद किए हैं। उन के मुताबिक़ पार्टी पर माफ़िया का क़बज़ा हो चुका है और नज़रियाती लोगों के लिए इस जमात में अब कोई जगह बाक़ी नहीं रही। इन का ये भी कहना है कि ख़ैबर पख्तून्ख्वा के वज़ीर-ए-आला की रिश्तेदार ख़वातीन को मेरिट से हट कर टिकट जारी किए गए जबकि दोहरी शहरीयत के हामिल कई अफ़राद पार्टी इंतिख़ाबात लड़ चुके हैं लेकिन उन को अमरीकी शहरीयत तर्क कर देने के बावजूद पार्टी इंतिख़ाबात में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।

61 साला फौज़िया क़सूरी इमरान ख़ान की देरीना साथी और पाकिस्तान के साबिक़ वज़ीर-ए-ख़ारजा ख़ुरशीद महमूद क़सूरी की क़रीबी अज़ीज़ हैं। आजकल बाअज़ अख़बारी रिपोर्टों में उन के आइन्दा मुस्लिम लीग नून में शामिल हो जाने का इमकान भी ज़ाहिर किया जा रहा है। वो ख़ुद भी ये बात तस्लीम कर चुकी हैं कि जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने उन्हें शमूलीयत की दावत दे रखी है।

मुनज़्ज़ह हसन के ख़्याल में पी टी आई के ख़वातीन विंग में असर-ओ-रसूख़ की हामिल फौज़िया क़सूरी के पार्टी से चले जाने से पार्टी को कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ेगा लेकिन तहिरीक-ए-इंसाफ़ के कामो की तवील अर्से से कवरेज करने वाले मुक़ामी सहाफ़ी अमजद महमूद कहते हैं, नज़रियाती लोगों का इस पार्टी को छोड़ना एक अहम बात है और फौज़िया क़सूरी की रुख़्सती को बारिश का पहला क़तरा समझना चाहिए।

उन के बाक़ौल तहिरीक-ए-इंसाफ़ में पुराने और नए लोगों का इख़तिलाफ़ तो पहले से ही मौजूद था। ये इख़तिलाफ़ ज़रदारी और मुशर्रफ़ की हुकूमतों में शरीक अफ़राद के पार्टी में आने और फुट के बलबूते पर पार्टी के अहम ओहदों पर आ जाने से संगीन सूरत-ए-हाल इख़तियार कर गया था, ये लोग इंतिख़ाबी सूनामी की उम्मीद पर ख़ामूश थे लेकिन इंतिख़ाबात में मतलूबा कामयाबी ना मिलने पर अब ये इख़तिलाफ़ात सर उठाने लगे हैं।

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