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इरानी दरआमदात केलिए हिंदूस्तान का यूरो में अदायगीयों का इख़तेताम

नई दिल्ली। 3फरवरी (पी टी आई)। हिंदूस्तान जारीया हफ़्ते के ख़त्म पर इरान के ख़ाम तेल की दरआमदात के लिए इरान को तुर्की बैंक के तवस्सुत से 18 माह क़दीम अदाएगी के इंतेज़ामात तर्क करदेगा, क्योकी इस्लामी जमहूरीया इरान पर आइद की जाने वाली अमे

नई दिल्ली। 3फरवरी (पी टी आई)। हिंदूस्तान जारीया हफ़्ते के ख़त्म पर इरान के ख़ाम तेल की दरआमदात के लिए इरान को तुर्की बैंक के तवस्सुत से 18 माह क़दीम अदाएगी के इंतेज़ामात तर्क करदेगा, क्योकी इस्लामी जमहूरीया इरान पर आइद की जाने वाली अमेरीकी तहदेदात का 6 फरवरी से आग़ाज़ होरहा है।

वज़ारत तेल के एक ओहदेदार ने कहा कि यक़ीनी तौर पर हिंदूस्तान को 6 फरवरी से तीसरे मुल्क के ज़रीया इरानी दरआमदात के लिए अदाएगी तर्क करनी होगी। हिंदूस्तान जुलाई 2011 से यूरो में अदाएगी कररहा है ताकि इरानी तेल की खरीदारी के 55 फ़ीसद बकाया जात तुर्की फ्रैंक हालिक अनक़रा के तवस्सुत से अदाएगी की जा सके।बाक़ी अदाएगी कोलकता की यूको बैंक के ज़रीये रूपयों में की जाएगी।

यूरो में अदाएगी बंद करदी जाएगी, लेकिन हिंदूस्तान इरानी दरआमदात की रूपयों में अदाएगी जारी रखेगा। अमेरीकी वज़ारत-ए-ख़ज़ाना की नई तहदेदात के मुताबिक़ बैंकों पर इरानी तेल का मालिया दरआमद कुनिंदा ममालिक की तरफ‌ से अदाएगी करने पर इमतिना आइद किया गया है।

इस पाबंदी पर 6 फरवरी से अमल आवरी होगी। इसका मतलब ये होगा कि इरान अपने तेल की कीमत मुक़ामी बैंक एकाऊंटस में रखने पर मजबूर होगा और ये बैंक इन ममालिक के होंगे जिन्होंने इरान से तेल खरीदा हो। ये मालिया जो तेल की आमदनी से हासिल होगा, इजाज़त याफ़ता ख़िदमात और अशिया-ए-जैसे ग़िज़ा, दवाएं और बुनियादी तिब्बी ह‌लात तेल के ममालिक से खरीदने पर ख़र्च किया जा सकेगा।

ग्राहक ममालिक ये एशिया-ए-इस्लामी जमहूरीया इरान को बरामद करसकेंगे। वज़ारत तेल के ओहदेदार ने कहा कि हिंदूस्तान, तुर्की बैंक में एक अरब 20 करोड़ अमेरीकी डाँलर का फ़ाज़िल सरमाया रखता है। ये रक़म आइन्दा दो माह तक खरीदे जाने वाले ख़ाम तेल की 55 फ़ीसद कीमत अदा करने के लिए काफ़ी होगी, जिस के सिलसिले में इरान से मुआहिदा होचुका है कि माहाना एक अरब अमेरीकी डाँलर मालियती ख़ाम तेल गैर मुल्की बैंक के तवस्सुत से खरीदा जाएगा।

मार्च के बाद हिंदूस्तान को इरान से खरीदे हुए पूरे ख़ाम तेल की कीमत रूपयों में अदा करनी होगी। उसे तरीके तलाश करने होंगे जिन के ज़रीये इरान इस मालिया को ज़्यादा तादाद में ग़िज़ाई अनाज‌ यह हथियार यह मिशनरी बिशमोल कारें और ट्रैक्टर्स तेल खरीदने वाले ममालिक से हासिल करसके।

सरकारी ओहदेदार के बमूजब नई तहदेदात का मतलब ये है कि क़ौमी इरानी ऑयल कंपनी को लाज़िमी तौर पर अपनी आमदनी का तमाम मालिया जो हिंदूस्तानी रिफ़ाईनरीज़ को तेल फ़रोख़त करने से हासिल होगा, यूको बैंक यह किसी इजाज़त याफ़ता मुक़ामी बैंक में रखना होगा और उसे इजाज़त याफ़ता अशिया-ए-और ख़िदमात खरीदने के लिए ख़र्च करना होगा।

ये तरीका-ए-कार क़ाबिल अमल है, लेकिन इरान हिंदूस्तान से तेल की फ़रोख़त से हासिल होने वाले मालिया की सिर्फ़ 20 फ़ीसद रक़म ही दरआमदात के लिए ख़र्च करता है।

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