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इरान पर हमले के लिए नितिन याहू के मंसूबे का इन्किशाफ़

यरूशलम, ०६ नवंबर( पीटीआई) इसराईल के सख़्त गैर-ओ-जंगजू सिफ़त वज़ीर-ए-आज़म बिंजामन नितिन याहू ने अपने सिक्योरिटी फोर्सेस को 2010 में इरानी न्यूक्लियर तनसीबात पर हमले के लिए तैयार रहने का हुक्म दिया था लेकिन उन के फ़ौजी सरबराह और जासूस इदारा

यरूशलम, ०६ नवंबर( पीटीआई) इसराईल के सख़्त गैर-ओ-जंगजू सिफ़त वज़ीर-ए-आज़म बिंजामन नितिन याहू ने अपने सिक्योरिटी फोर्सेस को 2010 में इरानी न्यूक्लियर तनसीबात पर हमले के लिए तैयार रहने का हुक्म दिया था लेकिन उन के फ़ौजी सरबराह और जासूस इदारा मोसाद के आला ओहदेदारों ने उन के अहकाम(हुक्म) मानने से इनकार कर दिया था और नितिन याहू के इस क़दम को एक ऎसा गैरकानूनी हर्बा(आक्रमण) क़रार दिया था, जो जंग के सरका (चोरी) के मुतरादिफ़ (बराबर) है ।

एक इसराईली चैनल की तहक़ीक़ाती रिपोर्ट के मुताबिक़ इसराईल के फ़ौजी सरबराह और जासूस इदारे के ज़िम्मेदारों ने सख़्ती के साथ इस इक़दाम की मुख़ालिफ़त की थी क्योंकि ऐसी कार्रवाई दो मुल्कों को जंग के दहाने पर पहूँचा सकती थी । नितिन याहू ने 2010 में अपनी हुकूमत के साथ सीनियर वुज़रा के फ़ोर्म के एक अहम इजलास के इख्त्तेताम ( समाप्ति) पर हुक्म दिया था कि इसराईली सिक्योरिटी और चौकसियों की तैयारी को पुलिस के यू ज़मुरा तक बढ़ा दिया जाए, जिसका मतलब किसी फ़ौजी कार्रवाई के लिए तैयार हो जाना होता है ।

इस इजलास ( सभा) में उस वक़्त के फ़ौजी सरबराह ग़बी अश्कनाज़ी और जासूस इदारा मोसाद के साबिक़ सरबराह मीर दगान ने भी शिरकत की थी । चैनल 2 के प्रोग्राम युवा डॉ (हक़ीक़त) की तरफ़ से की गई तहकीकात के मुताबिक़ मोसाद के सरबराह ने इरान पर हमले की सख़्त मुख़ालिफ़त करते हुए कहा था कि बिंजामन नितिन याहू और उन के वज़ीर दिफ़ा ( रक्षा मंत्री) एहूद बराक ने जंग छेड़ने का गैरकानूनी फैसला कर सकते हैं हालाँकि सिर्फ़ काबीना ( Cabinet) का इजलास-ए-कामिला ही इस मसला पर फैसला करने का मजाज़ होता है ।

इस दौरान ग़बी अश्कनाज़ी के करीबी साथियों ने कहा है कि साबिक़ इसराईली दिफ़ाई फोर्सेस के सरबराह को अपने मुल्क में सिक्योरिटी की सतह में इज़ाफ़ा पर गहरी तशवीश थी क्योंकि इस से ऐसे नए हक़ायक़ मंज़र-ए-आम पर आ सकते थे जो जंग का सबब बन सकते थे ।

बराक ने इस चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा कि अशकनाज़ी ने नितिन याहू को जवाब देते हुए कहा था कि इसराईली दिफ़ाई फोर्सेस ऐसी सूरत-ए-हाल पैदा करने या इससे निमटने के लिए तैयार नहीं है और ना ही इन में नितिन याहू के अहकाम पर तामील की अमली सलाहियत मौजूद है ।

वज़ीर ए दिफ़ा के ये दावे अशकनाज़ी और दगान के मौक़िफ़ से मुतज़ाद हैं। जिन्होंने कहा है कि सिक्योरिटी सतह में पी पुलिस तक इज़ाफ़ा का मतलब ज़रूरी तौर पर जंग छेड़ना नहीं है। यहूद बराक ने कहा कि सरबराह अफ़्वाज को अपनी मुहिम की सलाहियतों में इज़ाफ़ा करना चाहीए । उन्हें पेशा वाराना नुक़्ता-ए-नज़र से हमें ये कहना चाहीए कि आया वो इस हुक्म पर तामील करने की सलाहियत रखते हैं और अगर नहीं रखते हैं तो इस सूरत में वो अपनी सिफ़ारिशात पेश कर सकते थे ।

और हुकूमत उन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ यह इस के बरख़िलाफ़ काम करने का इख़तियार रखती है। दूसरी तरफ़ अशकनाज़ी ने खु़फ़ीया बात चीत के दौरान दावा किया कि वो इस फ़ौजी कार्रवाई के लिए तैयार तो थे । इसराईली दिफ़ाई फोर्सेस भी हमले के लिए चौकस हो चुके थे लेकिन उन्होंने महसूस किया कि ऐसा करना हिक्मत-ए-अमली की एक फ़ाश ग़लती होगी ।

चैनल 2 ने अशकनाज़ी के हवाले से कहा कि एक इसी चीज़ है जो आप उस वक़्त तक नहीं करसकते जब तक आप यक़ीनी तौर पर इस के बारे में मुकम्मल तौर पर बाख़बर नहीं होते । अशकनाज़ी ने नितिन याहू के हुक्म की सख़्त मुख़ालिफ़त करते हुए खुले आम कहा था कि अगर इरान पर हमला किया जाता है तो वो इसे हुक्म पर तामील करने के बजाय अपनी वर्दी उतार देने को तरजीह देंगे ।

अलबत्ता अशकनाज़ी ने इरान के न्यूक्लियर अज़ाइम को नाकाम बनाने के लिए खु़फ़ीया सरगर्मियां जारी रखने की ताईद की थी। अशकनाज़ी ने यहां कौंसल बराए अमन-ओ-सलामती के एक इजलास से ख़िताब करते हुए कहा कि में आज भी ये समझता हूँ कि हमें अपनी खु़फ़ीया मुहिम जारी रखनी चाहीए और हर ऐसी कार्रवाई की जानी चाहीए जो जंग से कम हो ।

सुबकदोशी से क़बल इन दोनों रीटायर्ड ओहदेदारों के ताल्लुक़ात अपने सयासी आक़ाओ के साथ इंतिहाई कशीदा और दुशवार गुज़ार थे जिस पर इसराईली ज़राए इबलाग़ ( मीडिया) ने ग़ैरमामूली तवज्जा दी थी ।

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