Tuesday , June 19 2018

इराक़ में चार मसाजिद पर हमले, 12 अफ़राद जांबाहक़

इराक़ के तीन बड़े शहरों में अहले सुन्नतुल जमाअत मसलक की चार जामा मसाजिद पर नामालूम दहशतगर्दों की जानिब से किए गए बम हमलों में कम से कम 12 अफ़राद जांबाहक़ और तक़रीबन 50 दीगर ज़ख़मी होगए हैं। धमाकों से मसाजिद को भी शदीद नुक़्सान पहुंचा है।

इराक़ के तीन बड़े शहरों में अहले सुन्नतुल जमाअत मसलक की चार जामा मसाजिद पर नामालूम दहशतगर्दों की जानिब से किए गए बम हमलों में कम से कम 12 अफ़राद जांबाहक़ और तक़रीबन 50 दीगर ज़ख़मी होगए हैं। धमाकों से मसाजिद को भी शदीद नुक़्सान पहुंचा है।

इराक़ के एक सीनीयर सेक्युरिटी ज़राये ने फ़्रांसीसी ख़बररसां इदारे एएफ़पी को बताया कि मंगल की शब करकोक शहर के जुनूब में नामालूम हमला आवरों ने जामे मस्जिद अम्र बिन अबदुल अज़ीज़ और मस्जिद अलसालहीन में बम धमाके किए, जिनके नतीजे में मुतअद्दिद अफ़राद जांबाहक़ और ज़ख़मी हुए। करकोक के डायरेक्टर महिकमा-ए-सेहत सबाह अमीन ने बताया कि मसाजिद पर हमलों के नतीजे में अस्पतालों में 7 अफ़राद की मय्यतें लाई गई हैं, जबकि 31 ज़ख्मियों को भी ईलाज के लिए अस्पतालों को मुंतक़िल किया गया।

एएफ़पी के नामा निगार का कहना है कि मसाजिद में हुए धमाकों के नतीजे में दोनों मस्जिद मलबे का ढेर बन गई हैं। उधर दार-उल-हकूमत बग़दाद से 160 किलो मीटर जुनूब में अलकोत शहर में जामे मस्जिद इमाम अली के क़रीब बारूद से भरी एक कार के ज़रिये धमाका किया गया, जिसके नतीजे में दो अफ़राद जांबाहक़ और नौ ज़ख्मी होगए। मेडिकल और सेक्युरिटी ज़राए ने अलकोत की जामा मस्जिद में धमाकों के नतीजे में होने वाली हलाकतों की तसदीक़ की है।

हुक्काम का कहना है कि बग़दाद में जामा मस्जिद अहमद अलमख़तार में दो बम धमाके हुए, जिस के नतीजे में तीन अफ़राद जांबाहक़ और कम से कम 9 ज़ख़मी बताए जाते हैं। अहले सुन्नतुल जमाअत की मसाजिद पर हमले एक ऐसे वक़्त में हुए हैं जब दो रोज़ पहले अबु ग़रीब और अलताजी जेलों पर अस्करियतपसंदों के हमलों में सैकड़ों क़ैदी फ़रार होगए थे। जेलों से फ़रार होनेवालों की बड़ी तादाद अलक़ायदा के निहायत मतलूब जंगजूओं पर मुश्तमिल बताई जाती है। इराक़ में पुरतशद्दुद वाक़ियात पिछले कई साल से साथ जारी हैं। ताहम हालिया तीन महीनों के दौरान खूँरेज़ कार्यवाईयों में इज़ाफ़ा देखा गया है। अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के जारी किये गये आदादो शुमार के मुताबिक़ गुज़िशता तीन माह में कम से कम 2500 अफ़राद हलाक हो चुके हैं।

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