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इलाज, पढ़ाई और मकान के लिए निकाली जा सकेगी पीएफ की रकम

दिल्ली : पीएफ निकालने के प्रस्तावित नियमों में मरकज़ी हुकूमत ने सुधार कर दिया है. लेबर वुजरा ने पीर को दस्तूरुल अमल में सुधार का ऐलान करते हुए कहा कि कोई भी अकाउंट होल्डर इलाज, हाउसिंग, शादी और बच्चों की पढ़ाई के लिए खाते में जमा पूरी रकम निकाल सकता है.

प्रस्तावित कानून के ऐलान के बाद से ही पेसोपेश में पड़े पीएफ खाताधारकों के लिए यह बड़ी राहत कही जा सकती है. हालांकि, मौजूदा नियम (30 अप्रैल तक लागू) के तहत कोई भी सख्श नौकरी छोड़ने के दो महीने के बाद अपने पीएफ की पूरी रकम निकाल सकता है. इसके अलावा नौकरी के दौरान भी अकाउंट होल्डर को 54 साल की उम्र में पीएफ की रकम निकालने की तजवीज है.

गुजिशता दिनों मरकज़ी हुकूमत ने पीएफ निकालने पर कई नए नियम लगाने का ऐलान किया था. 1 मई से लागू होने वाले इस प्रस्तावित दस्तूरुल अमल के तहत कोई भी एंप्लॉयी नौकरी छोड़ने या निकाले जाने के बाद भी पूरा पीएफ नहीं निकाल सकता. उसे 58 साल के बाद ही पीएफ की पूरी रकम निकालने का हक़ होगा.

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लेबर वुजरा के मुताबिक हाउसिंग, संगीन बीमारी के इलाज (अपने या परिवार के किसी सदस्य), बच्चों की मेडिकल, डेंटल और इंजिनियरिंग की पढ़ाई और उनकी शादी के लिए मेम्बर पीएफ की पूरी रकम निकालने के लिए दरख्वास्त कर सकेंगे. यह राहत रियासत और मरकज़ी हुकूमत के मुलाज़िम को भी दी गई है. यह प्रावधान इसी साल अगस्त से लागू होंगे.

ट्रेड यूनियनों की तरफ से लेबर वज़ीर बंडारू दत्तात्रेय को मेमोरेंडम सौंपे जाने के बाद प्रस्तावित नियमों में यह फिर बदल किया गया है. एक सरकारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि वुजरा ने फैसला लिया है कि मेंबर को अपनी पूरी जमा रकम निकालने का ऑप्शन देगी. अगर दरख्वास्त गुज़ार ऊपर के वजहों के चलते दरख्वास्त करता है तो वह निकालने के दिन तक के इन्टरेस्ट की रकम को भी निकालने का हक़ होगा.

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