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इलाहाबाद हाईकोर्ट की मौजूदा इमारत के सौ साल, मुस्लिम जजों ने रचा है एक नया इतिहास

इलाहबाद: अपने बेबाक और ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रसिद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट की मौजूदा इमारत के सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट को डेढ़ सौ साल पहले स्थापित किया गया था वहीं हाईकोर्ट के मौजूदा इमारत के सौ साल पूरे हो गए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट की तारीख मुस्लिम वकीलों की तारीख है। इस हाई कोर्ट से जुड़े मुस्लिम न्यायाधीशों ने देश के कानूनी विभाग में एक इतिहास रचा है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय की कानूनी सेवायें शानदार रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह गौरव भी प्राप्त है कि यहां सबसे ज्यादा मुस्लिम न्यायाधीशों ने अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन किये हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के डेढ़ सौ वर्ष और मौजूदा इमारत के सौ साल पूरे होने पर आज भी जस्टिस महमूद और सर शाह सुलैमान की असाधारण कानूनी सेवायें यहाँ की शानदार विरासत में शुमार की जाती हैं।
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना 1866 में ही अमल में आ गया था लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय को मौजूदा इमारत में स्थानांतरित हुए एक सदी का समय बीत गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की तारीख मुस्लिम कानूनदानों का इतिहास भी है।
हाई कोर्ट के पहले भारतीय न्यायाधीश सर सैय्यद के पुत्र सैयद महमूद थे। इसी तरह हाई कोर्ट के पहले भारतीय न्यायाधीश सरशाह सुलैमान थे।
इसके अलावा हाईकोर्ट से जुड़े दर्जनों ऐसे मुस्लिम कानूनदानों के नाम हैं, जिन्होंने कानून और राजनीति के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की इमारत के सौ साल पूरे होने पर उसे दुल्हन की तरह सजाया गया।
हाईकोर्ट इमारत की सौ साला सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश रंजन गगोई ने किया।
उद्घाटन सत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी बी भोसले सहित देश के प्रमुख कानूनदानों और बुद्धिजिवियों ने भाग लिया।
इस मौके पर जस्टिस रंजन गोगोई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौ लाख से भी अधिक मामले लंबित होने पर अपनी कड़ी चिंता जताई। उनका कहना था कि मामलों का बोझ कम करने के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत है।

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