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इशरत जहां केस से लाइलमी का इज़हार

मुंबई: इशरत जहां केस के जारिये तनाज़ा पर साबिक़ मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला सुशील कुमार शिंदे ने आज कहा कि वो इस मसले की जानकारी नहीं रखते क्योंकि इस केस की एक भी फाईल उनकी नज़र से नहीं गुज़री थी। क़ौमी तहक़ीक़ाती एजेन्सी के साबिक़ ओहदेदार लोक नाथ भेरा के रिमार्कस पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए शिंदे ने कहा कि इशरत जहां केस के बारे में तमाम दावे बे-बुनियाद हैं।

उन्होंने कहा कि कोई ओहदेदार उनसे रुजू हुआ और ना ही मैंने किसी से बातचीत की थी। वाज़िह रहे कि सुशील कुमार शिंदे यूपीए हुकूमत II जुलाई 2012 से मई 2014 तक मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला थे जबकि केरला कैडर के आईपीएस ओहदेदार मिस्टर लोक नाथ भेरा ने जोकि एनआईटीम से वाबस्ता थे साल 2010 मे डेविड‌ हेडली से पूछ ताच के लिए अमरीका का दौरा किया था बताया कि इशरत के बारे में हेडली ने इस वक़्त कहा था कि उन्हें याद नहीं रहा लेकिन हालिया मुंबई कोर्ट में वीडियो कान्फ़्रेंस के ज़रिये हेडली ने जो इक़्बालिया बयान दिया है उन्हें अचानक याद आगया कि हेडली ने तो ये बातें साल 2010 में एनआईटीम से कही थी।

अमरीकी जेल में मुक़य्यद डेविड हेडली ने 26/11 मुंबई दहशतगर्द हमलों के सिलसिले में ये इन्किशाफ़ किया था कि इशरत जहां दरअसल लश्करे तैय‌बा की कारिंदा थी जिसका अहमदाबाद के मुज़ाफ़ात में 15 जून 2004 को गुजरात पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था|

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