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इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में अमित शाह से पूछ-ताछ करने वाले CBI अफसर की कहानी

नई दिल्ली। इशरत जहाँ केस में अमित शाह से पूछताछ करने वाले आईपीएस अफसर संदीप तामगड़े पिछले तीन महीने से अपनी पोस्टिंग के लिए ख़ाक छान रहे है. दिल्ली में तख़्त और ताज बदलते ही इस आईपीएस अफसर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. संदीप का गुनाह सिर्फ ये था कि सीबीआई मुंबई (स्पेशल क्राइम्स ब्राँच) के एसपी की हैसियत से उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता अमित शाह से तीन घंटे सवाल जवाब किया था.
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तकरीबन दो साल पहले मई 2014 को जैसी ही नई सरकार ने दिल्ली में शपथ ली और अमित शाह सत्ताधारी बीजेपी के अध्यक्ष बने, उसी वक़्त संदीप को मुंबई की क्राइम ब्रांच से हटाकर नागपुर भेज दिया गया. इससे पहले संदीप मुंबई और नागपुर दोनों का चार्ज देख रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक संदीप से इशरतजहां और सोहराबुद्दीन जैसे एनकाउंटर केस की जांच ले ली गई. नागपुर में उन्हें एंटी करप्शन का काम दिया गया. लेकिन मुसीबत इतनी ही नहीं थी. सीबीआई ने सबक सिखाने के लिए दो मामलो में उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच की फाइल खोल दी. इन्तहा तब हुई जब संदीप के स्पेशल सिक्योरिटी भी वापस ली गई. इस बीच संदीप की पत्नी बीमार हो गई और उनकी मुसीबतें और बढ़ी.
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नागपुर में पत्नी और फिर बहन का इलाज़ करा रहे संदीप को वापस नगालैंड भेजने के लिए कहा गया. सूत्रों के मुताबिक संदीप कहते रहे कि वो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और नगालैंड में अच्छे अस्पताल न होने के कारण वो पत्नी और बहन को अकेला नागपुर नहीं छोड़ सकते . लेकिन मुसीबतों का पहाड़ टूटता चला जा रहा था. साल भर के भीतर संदीप के पिता भी चल बसे और अब सारी जिम्मेदारी उनके कंधो पर आगयी.

इससे पहले की नौकरी चली जाय, संदीप किसी तरह नगालैंड पहुंचे और उन्होंने वहां DIG का काम सभाला. उधर नागपुर में घर की चिंताएं सता रही थी. क्यूंकि संदीप का जमीर नहीं डिगा था इसलिए वो नागपुर के अपने विधायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से मिले. फड़नवीस ने उन्हें सांत्वना दी की अगर नगालैंड की सरकार उन्हें NOC देती है तो वो महराष्ट्र डेपुटेशन पर वापस आ सकते हैं.

लेकिन इशरतजहां का केस सुनते ही फड़नवीस के भी हाथ पाँव फूल गए. इस बीच फरवरी 2016 तक उन्हें नगालैंड सरकार ने उनके घर के हालात देखकर NOC दे डाली. संदीप का इस NOC के आधार पर डेपुटेशन पर महारष्ट्र भेजे जाने का फैसला अब दिल्ली में गृह मंत्रालय को करना था. गृह मंत्रालय पहले तो तैयार हुआ लेकिन जैसे ही राजनाथ सिंह तक खबर पहुंची कि संदीप ने इशरतजहां केस में अमित शाह का इंटेरोगेशन किया है की फाइल को सांप सूंघ गया. पिछले तीन महीनो से फाइल पर धूल जमी है और संदीप घाट घाट के चक्कर काटने को मज़बूर हैं.

सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच मुंबई की टीम को इशरतजहां और सोहराबुद्दीन के कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर की जांच दी गई थी. ये जांच जब अपने मुकाम पर पहुँच रही थी तो 2010 में संदीप तामगड़े को इसी ब्रांच में एसपी पोस्ट किया गया. उस वक़्त ब्रांच के डीआईजी, ओडिशा काडर के आईपीएस अमिताभ ठाकुर और जॉइंट डायरेक्टर केरल के आईपीएस आरआर सिंह थे.

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के वक़्त ज्यादातर सवाल एसपी ने ही किये थे. इस बीच अमिताभ ठाकुर को वापस ओडिशा भेज दिया गया और जांच का सारा जिम्मा संदीप के सर पर आ धमका. सूत्रों ने बताया की जांच को लेकर संदीप और तत्कालीन स्पेशल डायरेक्टर अनिल सिन्हा में विवाद भी हुआ था. संदीप का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये था की 2014 में जब सरकार बदली तो अनिल सिन्हा ही सीबीआई के डायरेक्टर बन गए.

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