Tuesday , December 12 2017

इशरत जहां मुक़द्दमा की तहक़ीक़ात पर अदालती फ़ैसला महफ़ूज़ , साबिक़ मोतमिद दाख़िला की सरज़निश

अहमदाबाद २४ नवंबर ( पी टी आई ) गुजरात हाइकोर्ट ने 2004 -ए-के मुंबई की तालिबा इशरत जहां और दीगर टीम के फ़र्ज़ी एन्काउन्टर मुक़द्दमा की तहक़ीक़ात किस महिकमा से करवाई जाएं और ताज़ा एफ़ आई आर दर्ज किया जाय या नहीं , के बारे में अपना फ़ैसला यक्म दिस

अहमदाबाद २४ नवंबर ( पी टी आई ) गुजरात हाइकोर्ट ने 2004 -ए-के मुंबई की तालिबा इशरत जहां और दीगर टीम के फ़र्ज़ी एन्काउन्टर मुक़द्दमा की तहक़ीक़ात किस महिकमा से करवाई जाएं और ताज़ा एफ़ आई आर दर्ज किया जाय या नहीं , के बारे में अपना फ़ैसला यक्म दिसम्बर्र तक महफ़ूज़ कर दिया ।

हाइकोर्ट की डीवीझजन बंच ने जो जस्टिस जयंत पटेल और जस्टिस अभीलाशा कुमारी पर मुश्तमिल थी । ये नतीजा अख़ज़ किया कि फ़र्ज़ी ऎन्काउन्टर की तहक़ीक़ात किस महिकमा से करवाई जाय उस को क़तईयत देने का मुआमला और ताज़ा एफ़ आई आर इस के लिए दर्ज करना ज़रूरी है या नहीं इस का क़तई फ़ैसला यक्म दिसम्बर् को सुनाया जाएगा।

अदालत ने दरीं असना साबिक़ मर्कज़ी मोतमिद दाख़िला जी के पल्ले के इशरत जहां और दीगर तीन अफ़राद के फ़र्ज़ी ऎन्काउन्टर के बारे में तबसरा पर उन की सरज़निश करते हुए कहा कि किसी सीनीयर ओहदेदार से ऐसी तवक़्क़ो नहीं की जा सकती ।

हाइकोर्ट ने पेश करदा ऐस आई टी की रिपोर्ट के पेशे नज़र मुबय्यना तौर पर साबिक़ मर्कज़ी मोतमिद दाख़िला जी के पल्ले ने ज़राए इबलाग़ से कहा था कि ऐस आई टी ने सिर्फ ये कहा है कि एनकाउन्टर फ़र्ज़ी था लेकिन ये कहीं भी वाज़िह नहीं किया कि इशरत जहां और दीगर तीन अफ़राद दहश्तगर्द नहीं थी।

डीवीजन बंच ने जो इस मुक़द्दमा की समाअत कररही है कहा कि प्ले के रुतबे के किसी ओहदेदार से इस अंदाज़ में ज़राए इबलाग़ से बातचीत करने की तवक़्क़ो नहीं रखी जाती ।

उन्हें ऐस आई टी के इन्किशाफ़ात पर तबसरा नहीं करना चाहिए था जबकि ये मुआमला अदालत के ज़ेर-ए-ग़ौर है । हाइकोर्ट की डीवीजन बंच ने कहा कि इन का ये तबसरा आज़ादी तक़रीर की हदूद से तजावुज़ करजाता है । अस्सिटैंट सॉलीसिटर जनरल ने मर्कज़ी हुकूमत की पैरवी करते हुए अदालत से इत्तिफ़ाक़ किया कि साबिक़ मर्कज़ी ओहदेदार को ये तबसरा नहीं करना चाहिए था।

TOPPOPULARRECENT