इशा के बाद फ़ुज़ूल बातें ना करने उम्मत को हुज़ूर (स.अ.व.) का हुक्म

इशा के बाद फ़ुज़ूल बातें ना करने उम्मत को हुज़ूर (स.अ.व.) का हुक्म
हैदराबाद 18 जून : हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) का इरशाद मुबारक है कि इशा के बाद फ़ुज़ूल बातें मत करो , यानी जल्द सो जाओ और जल्द बेदार हो जाओ , आप (स.अ.व.) की इस हदीस पाक पर अमल करने वाले हमेशा कामयाबो कामरान रहे हैं और अल्लाह

हैदराबाद 18 जून : हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) का इरशाद मुबारक है कि इशा के बाद फ़ुज़ूल बातें मत करो , यानी जल्द सो जाओ और जल्द बेदार हो जाओ , आप (स.अ.व.) की इस हदीस पाक पर अमल करने वाले हमेशा कामयाबो कामरान रहे हैं और अल्लाह अज़्ज़ो वजल ने उन्हें इस सीरते रसूल (स.अ.व.) पर अमल करने पर सेहत दौलत , इज़्ज़त और इल्म की नेअमतों से सरफ़राज़ फ़रमाया।

दुनिया तो अहादीस मुबारका पर अमल कर रही है लेकिन हम मुस्लमान इस मुआमला में बहुत पीछे हैं नतीजा में ज़िंदगी का हर शोबा और उस की तरक़्क़ी हम से दूर होती जा रही है । इस सिलसिले में हम शहर हैदराबाद में हो रही शादियों की मिसालें पेश कर सकते हैं।

तक़रीब निकाह चाहे मस्जिद में हो या शादीख़ाने में हो मेहमान नए जोड़े को अपनी दुआ से नवाज़ने के लिए शिरकत करते हैं इस तरह वलीमा मसनूना में शरीक हो कर दुल्हा दुल्हन से नेक तमन्नाऐं का इज़हार करते हैं । ताहम अफ़सोस की बात ये है कि वक़्त की क़दर से महरूमी के नतीजा में आज कल की शादियों और वलीमे की तक़ारीब का अजीब हाल हो गया है।

हमारे शहर में शादी के मौक़ा पर बाज़ाब्ता तौर पर रुक्के में वक़्त निकाह बाद नमाज़ मग़रिब या बाद नमाज़ इशा लिखा जाता है । लेकिन नौशा दस साढे़ दस यहां तक कि ग्यारह बारह बजे तशरीफ़ लाते हैं और मेहमान उन का इंतेज़ार करते करते थक जाते हैं जब कि मेहमानों में ऐसे मर्द और ख़वातीन भी होती हैं जो ज़्याबतीस (शूगर) के आरिज़ा में मुबतला होते हैं । उन मरीज़ों के लिए वक़्त पर खाना बहुत ज़रूरी होता है।

दूसरी तरफ़ मासूम बच्चे नौशा के इंतेज़ार में बैठे बैठे सोने लगते हैं, नतीजतन नौशा, नौशा के रिश्तेदारों के बारे में नापसंदीदा ख़्यालात का इज़हार करना शुरू कर देते हैं । मेहमानों बिलख़ुसूस शूगर से मुतास्सिरा मेहमानों और मासूम बच्चों को नौशा के ताख़ीर से आने के बाइस जो तकलीफ़ होती है इस का वबाल किस पर जाएगा ? इस का जवाब यही है कि मेज़बान पर ही मेहमानों को होने वाली तकलीफ़ का वबाल जाएगा।

आजकल अक्सर लोग मसाजिद में निकाह करते हुए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन मसाजिद में निकाह के बाद तवक़्क़ो के ऐन ख़िलाफ़ दूल्हे शादी ख़ानेजाने की बजाए अपने घर वापिस हो रहे हैं और शादी ख़ाना में मेहमान बेचैनी से ये सोचते हुए नौशा का इंतेज़ार कर रहे हैं कि नौशा अब आएंगे तब आएंगे जब कि नौशा मेहमानों को तड़पाते हुए ख़ुसूसी मेकअप करवाने में मसरूफ़ हैं।

अगर उन की नई ज़िंदगी की शुरूआत ही इसी हों तो इख़तेताम कैसा होगा इस बारे में आप लोग ख़ुद सोच सकते हैं । कुछ रोज क़ब्ल हसन नगर में हम ने देखा कि रात के साढे़ ग्यारह बजे नौशा शादी ख़ाना के बाहर अपने बरातियों के साथ ठहरे हैं और बैंड बाजे पर बेहूदा रक़्स जारी है उन लोगों को शादीख़ाना में मौजूद मेहमानों की कोई फ़िक्र ही नहीं है।

दूसरी जानिब हर कोई शादीख़ानों में नौशा का ताख़ीर से आना निकाह में देरी को बहुत बुरा अमल क़रार देता है लेकिन वक़्त की पाबंदी से गुरेज़ की बुराई का ख़ात्मा करने कोई आगे नहीं आता । आज हमारा हाल किरदार के नहीं बल्कि गुफ़्तार के गाज़ियों जैसा हो गया है।

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