Monday , December 11 2017

इश्तिहारात केलिए शराइत-ओ-ज़वाबत मुक़र्रर किए जाएंगी: अमबीकासोनी

नई दिल्ली । 11 नवंबर (एजैंसीज़) वज़ीर-ए-इतला-आत-ओ-नशरियात अमबीकासोनी ने इश्तिहार के शोबे की तरक़्क़ी और फ़रोग़ के लिए उसूल-ओ-ज़वाबत मुक़र्रर किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि क़ारईन की तादाद और टेलीविज़न की रेटिंग से मुताल्लिक़ मीडीया

नई दिल्ली । 11 नवंबर (एजैंसीज़) वज़ीर-ए-इतला-आत-ओ-नशरियात अमबीकासोनी ने इश्तिहार के शोबे की तरक़्क़ी और फ़रोग़ के लिए उसूल-ओ-ज़वाबत मुक़र्रर किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि क़ारईन की तादाद और टेलीविज़न की रेटिंग से मुताल्लिक़ मीडीया नताइज तरीका-ए-कार को सख़्त और मुल़्क की आबादी के हक़ायक़ और समाजी, सक़ाफ़्ती और इक़तिसादी तौर पर तफ़ावुत के मुताबिक़ ही होना चाहीयॆ।
उन्हों ने कहा कि सभी मुश्तहरीन चाहते हैं कि इन के वसाइल का सही मुक़ाम-ओ-सही वक़्त और सही क़ीमत पर इस्तिमाल हो। गुज़शता दस सालों में इश्तिहारात का बाज़ार लग भग 10 हज़ार करोड़ रुपय से बढ़ कर 30 हज़ार करोड़ रुपय तक जा पहुंचा है जो दूसरे ममालिक के लिए हसद का बाइस बन गया है।

मीडीया और ऐंटरटेनमैंट इंडस्ट्री में तिजारती मवाक़े का ज़िक्र करते हुए अमबीकासोनी ने कहा कि हाल में जो क़ानून-ओ-उसूल-ओ-ज़वाबत से मुताल्लिक़ जो फ़ैसले किए गए हैं इन से डीवलपमनट के इमकानात को तक़वियत हासिल हुई है।

प्रिंट मीडीया के शोबे में जो तरक़्क़ी हुई है वो मुल्क में बढ़ती हुई शरह ख़वांदगी से ज़्यादा है । इसी तरह 10 करोड़ से ज़ाइद अफ़राद इंटरनैट का इस्तिमाल कररहे हैं और ये तादाद रोज़ बह रोज़ बढ़ती ही जा रही है। मुवासलाती सहूलयात आसानी से आम आदमी को फ़राहम होरही हैं और ये सहूलत आम आदमी तक बेहतर तौर पर मुहय्या कराई जा सकॆ। इस के लिए हुकूमत ने हाल ही में नैशनल आर्टीकल फाइबर नैटवर्क बनाए जाने को मंज़ूरी दी है ताकि देही सतह पर बरॉडबैंड की कनीकटीवीटी मुहय्या हो सकॆ।

TOPPOPULARRECENT