Wednesday , December 13 2017

इश्तेआल अंगेज़ तकरीर और इश्तेहार पर दखल नही करेगी अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह लीडरों की इश्तेआल अंगेज़ तकरीर देने के मामले में दखल नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि हिंदुस्तान की आबादी 128 करोड़ है। 128 करोड लोगों के अलग अलग ख्याल होते हैं। यह जम्हूरियत की पुख्तगी है। एक मुफाद ए आम्मा की दरखा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह लीडरों की इश्तेआल अंगेज़ तकरीर देने के मामले में दखल नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि हिंदुस्तान की आबादी 128 करोड़ है। 128 करोड लोगों के अलग अलग ख्याल होते हैं। यह जम्हूरियत की पुख्तगी है। एक मुफाद ए आम्मा की दरखास्त पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि, जो शख्स इस तरह के तकरीर देता है वह इश्तेआल अंगेज़ (भड़काऊ) तकरीर नहीं हो सकती। दरखास्त में मांग की गई थी कि इलेक्शन कमीशन को यह हिदायत दी जाए कि वह लीडरों की तकरीरों ( इश्तेआल अंगेज़ तकरीरों) पर रोक लगाए, वोट के लिए लीडर जो गलत वादे करते हैं उन पर भी बंदिश लगाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों के सामने सभी तरह के ख्याल आने दीजिए और उनको ही फैसला करने दीजिए।

सुप्रीमकोर्ट ने हुकूमत की तरफ से अपनी कामयाबियों को गिनाते हुए दिए जाने वाले इश्तेहारात के कवानीन के लिए हिदायत तय करने के मुताल्लिक एक मुफाद ए आम्मा की दरखास्त पर गौर करने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस पी सदाशिवम की सदारत वाली बेंच ने दरखास्तगुजारों के वकील चित्तिलापिल्ली से कहा कि दरखास्त पर गौर करने का यह मुनासिब वक्त नहीं, आप इलेक्शन के बाद हमारे पास आ सकते हैं।

अदालत ने कहा कि अब इलेक्शन होने वाले हैं और ऐसे हालात में इस तरह की दरखास्त पर सुनवाई के लिये मुनासिब वक्त नहीं है। दरखास्तगुजार ने इल्ज़ाम लगाया था कि सरकारी खर्च पर रूलिंग पार्टी और उसके लीडरों के तश्हीर बाज़ी के लिये इश्तेहारात पर करोडों रूपए खर्च किये जा रहे हैं।

जजों ने कहा कि आप सही हैं, लेकिन वक्त सही नही है । इलेक्शन के बाद फिर से कोशिश कीजिये। हम इस वक्त दरखास्त पर गौर नहीं कर सकते हैं। जजों ने दरखास्तगुज़ार से सवाल किया कि वह आखिरी लम्हो में अदालत का दरवाजा क्यों खटखटायें ।

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