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इसराइल के नक्शेकदम पर भारत: मुस्लिम देशों से हिंदुओं को लाकर बसाने की योजना

हैदराबाद: पूरे देश का ध्यान यूनिफार्म सिविल कोड की बहस पर केंद्रित है, कोई इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है कि इजराइल की तर्ज़ पर भारत में भी धर्म के आधार पर राष्ट्रीयता देने के लिए रास्ता साफ करने की योजना बन रही है । इस मकसद के लिए सरकार नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करने की योजना बना रहा है । नागरिकता अधिनियम में इस संशोधन के बाद मुस्लिम देशों में रहने वाले हिंदुओं को भारत लाया जाएगा, यह भारत के संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है।

भारतीय संविधान, अनुच्छेद 14 में सभी धर्मों से संबंधित व्यक्तियों (विदेशी नागरिकों नागरिक समेत) के लिए समान अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन सरकार अधिनियम में संशोधन कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की कोशिश कर रही है । नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करने का सरकार का प्रस्ताव देश को एक साजिश के तहत हिंदू राष्ट्र में परिवर्तित करने का हिस्सा है।

फिलिस्तीन के एक छोटे से हिस्से पर कब्जा करने के बाद, इसराइल ने दुनिया के कोने-कोने से सभी यहूदियों को वापस लाने की घोषणा की थी। अपनी योजना में सफल होने के बाद, यह धार्मिक आधार पर देश का पुनर्वास करने वाला पहला देश बन गया। अब भारत भी इसराइल के नक्शेकदम पर चल रहा है और कानून बना कर पड़ोसी देशों के हिंदु, सिख, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करके वापस लाने के लिए तैयारी कर रहा है।

विपक्ष ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है और सरकार पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक आधार पर पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की कोशिश कर रही है ।

नागरिकता संशोधन विधेयक अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई धार्मिक समुदायों से संबंधित अवैध प्रवासियों को कैद या वापस न भेज कर उन्हें आने की अनुमति देना चाहता है। यह बिल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को जिनमें ज़्यादातर हिन्दू हैं, जो धार्मिक उत्पीड़न के डर से अपने देशों से भाग आये हैं, उन्हें नागरिकता देने में सरकार को सक्षम करेगा । यह विधेयक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को विशेष छूट देता है, और नागरिकता प्राप्त करने के लिए 11 साल निरंतर रहने की आवश्यकता को कम करके छह साल करने के लिए योजना बना रही है। विधेयक, हालांकि, अवैध मुस्लिम प्रवासियों पर लागू नहीं होगा।

सिआसत न्यूज़

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