Friday , December 15 2017

‘इसराईली चीज़ों का बाईकॉट शुरू’

फ़लस्तीन में जारी इसराईली जारहीयत के ख़िलाफ़ बैनुल अक़वामी सतह पर एहतेजाज का सिलसिला शुरू हो चुका है और दुनिया एक मर्तबा फिर इसराईली और सीहूनी नवाज़ चीज़ों के बाईकॉट की अपीलों का सिलसिला शुरू कर चुकी है।

फ़लस्तीन में जारी इसराईली जारहीयत के ख़िलाफ़ बैनुल अक़वामी सतह पर एहतेजाज का सिलसिला शुरू हो चुका है और दुनिया एक मर्तबा फिर इसराईली और सीहूनी नवाज़ चीज़ों के बाईकॉट की अपीलों का सिलसिला शुरू कर चुकी है।

इसराईल को मआशी तौर पर ग़ैर मुस्तहकम करने के लिए अगर मुसलसल इसराईली चीज़ों का बाईकॉट किया जाने लगे तो इस बात को यक़ीनी बनाया जा सकता है कि इसराईली टेक्नोलॉजी, फ़ौज ,दिफ़ाई सलाहीयतों के बावजूद इसराईल मआशी एतबार से अदम इस्तिहकाम का शिकार हो सकता है।

लेकिन उमूमन जब कभी इसराईल की जानिब से शदीद बमबारी फ़लस्तीनीयों पर की जाने लगती है उस वक़्त दुनिया बिलख़ुसूस मुसलमान उठ खड़े होते हैं ताकि इसराईल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जा सके जबकि आलमी माहिरीन ने ग़ाज़ा को दुनिया की सब से बड़ी जेल क़रार दिया है चूँकि यहां पर हरवक़्त इसराईली अफ़्वाज के मज़ालिम का सिलसिला जारी है।

इसराईल के समाजी बाईकॉट का नज़रिया रखने वालों को चाहीए कि वो मख़सूस हालात में ही इसराईली और सीहूनी नवाज़ प्रॉडक्ट्स का बाईकॉट ना करें बल्कि हमेशा ही इन अशीया के इस्तेमाल से इजतिनाब करते हुए उन के मुतबादिल अशीया इस्तेमाल करें चूँकि सारिफ़ीन जब इसराईली कंपनीयों और सीहूनी नवाज़ कंपनीयों के प्रॉडक्ट्स खरीदते हैं तो इस का मुनाफ़ा रास्त तौर पर इसराईल को हासिल होता है जो कि इसराईली फ़ौजी क़ुव्वत में इज़ाफ़ा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

फ़लस्तीन पर इसराईली बमबारी और ग़ाज़ा में मासूम बच्चों की हलाकतों पर हर आँख नम और हर क़ल्ब मुज़्तरिब नज़र आ रहा है लेकिन अपनी क़ुव्वत के एतबार से वो कुछ भी करने से क़ासिर हैं मगर हम हिंदुस्तान या हैदराबाद में रहते हुए भी इसराईल को मआशी ज़रब पहचाने के मुतहम्मिल हैं।

उल्मा और मशाइख़ीन ने बताया कि हम सब ग़ाज़ा और फ़लस्तीन के हालात का मुशाहिदा कर रहे हैं और हमें इस बात का बख़ूबी अंदाज़ा है कि इसराईल जैसे दरिन्दा सिफ़त मुल्क को आसानी से क़ाबू में किया जाना मुम्किन नहीं है लेकिन इस माहे मुबारक के दौरान मुसलमान ख़ुसूसी दुआओं के इलावा तद्बीरों के ज़रीया मुख़ालिफ़ इस्लाम कुव्वतों को मुसलमानों का क़त्ले आम बंद करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। —— (मुहम्मद मुबश्शिर उद्दीन ख़ुर्रम)

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