Friday , September 21 2018

इसराईल-फ़लस्तीन मसले का वाहिद हल फ़लस्तीनीयों की आज़ाद ममलकत की तशकील

हिन्दुस्तान ने कहा कि ग़ज़ा के मौजूदा बोहरान की यकसूई सिर्फ़ सियासी तस्वीर और मुज़ाकरात के ज़रिए मुम्किन है। इस इलाक़ा और इस के अवाम को दरपेश मसाइल की मोस्सर यकसूई के बारे में अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली से ख़िताब करते हुए हिन्

हिन्दुस्तान ने कहा कि ग़ज़ा के मौजूदा बोहरान की यकसूई सिर्फ़ सियासी तस्वीर और मुज़ाकरात के ज़रिए मुम्किन है। इस इलाक़ा और इस के अवाम को दरपेश मसाइल की मोस्सर यकसूई के बारे में अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली से ख़िताब करते हुए हिन्दुस्तान के मुस्तक़िल नुमाइंदा बराए अक़वाम-ए-मुत्तहिदा अशोक मुखर्जी ने कहा कि हिन्दुस्तान मौजूदा सूरत-ए-हाल पर गहिरी नज़र रखे हुए है और ग़ज़ा की सूरत-ए-हाल पर उसे बहुत ज़्यादा फ़िक्र है।

हिन्दुस्तान जंग बंदी की बरक़रारी के लिए तमाम कोशिशों की ताईद करता है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को यक़ीन है कि पायदार जंग बंदी अमन मुज़ाकरात के अहया से मरबूत है और ईसी तरह फ़लस्तीन के मसले की जामि यकसूई मुम्किन है। हिन्दुस्तान अपने इस मौक़िफ़ पर अटल है कि सिर्फ़ मुज़ाकरात ही वाहिद पायदार मुतबादिल हैं जिन के ज़ मसाइल की मोस्सर यकसूई मुम्किन है। 193 रुकनी जनरल असेम्बली से ख़िताब करते हुए मोतमिद उमूमी अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ने कहा था कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ग़ज़ा की तामीर-ए-नौ में आख़िरी बार मदद करने के लिए तैयार है क्योंकि ग़ज़ा और मग़रिबी किनारा में बेहिस मसाइब का दौर जारी है।

इस के अलावा इसराईल के मसाइब का भी ख़ातमा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसराईली और फ़लस्तीनी दोनों बैन-उल-अक़वामी बिरादरी के शहरी हैं और हमेशा बेचैन और फ़िक्रमंद रहे हैं। बेबसी से कई लोगों की हलाकत का मंज़र देखते रहे हैं। क्या हम ईसी तरह तामीर, तख़रीब, तामीर और तबाही का चक्कर चलाते रहेंगे?

उन्होंने कहा कि हम एक बार फिर तामीर करेंगे लेकिन ये आख़िरी अज़सर-ए-नौ तामीर होगी। इस का सिलसिला अब ख़त्म होना चाहिए। उन्हें बातचीत की मेज़ पर वापिस आना चाहिए। हम वक़फ़ा वक़फ़ा से इस अमल को दुहरा नहीं सकते। हिन्दुस्तान, अक़वाम-ए-मुत्तहिदा का एक दफ़्तर है।

अशोक मुखर्जी ने कहा कि हिन्दुस्तान तशद्दुद और तशद्दुद की धमकी जिस का निशाना आलमी इदारा हो, बर्दाश्त नहीं करसकता। हम उस की सख़्ती से मुज़म्मत करते हुए तहक़ीक़ात का मुतालिबा करते हैं। ख़ातियों को इंसाफ़ के कटहरे में खड़ा किया जाना और सज़ा देनी चाहिए। यही वाहिद रास्ता है जिस के ज़रिए अक़वाम-ए-मुत्तहिदा क़ानून की हुक्मरानी पर मबनी अपनी साख बरक़रार रख सकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान मुस्तक़िल तौर पर ग़ज़ा की नाका बंदी की मुख़ालिफ़त करता रहा है जिस से लाज़िमी ख़िदमात, मआशी सरगर्मीयां और इनफ्रास्ट्रक्चर का फ़रोग़ मुतास्सिर होरहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान बातचीत के ज़रिए इसराईल-फ़लस्तीन मसले का हल तलाश करने की किसी भी कोशिश की भरपूर ताईद करेगा।

अरब अमन मंसूबा और 4 बड़ी ताक़तों का लायेहा-ए-अमल एक ख़ुदमुख़तार, आज़ाद, पायदार और मुत्तहदा रियासत की तशकील की शक्ल में मुम्किन है जिस का दार-उल-हकूमत मशरिक़ी यरूशलम हो। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान फ़लस्तीनीयों के काज़ की ताईद का पाबंद है। दोनों के ताल्लुक़ात ज़माना दराज़ से असरी तारीख़ तक अपनी गहिरी जड़ें रखते हैं। अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असेम्बली को बांकी मौन के ख़ुसूसी क़ासिद बराए मशरिक़ वुसता राबर्ट कैरी ने इलाक़े की तफ़सीली सूरत-ए-हाल से वाक़िफ़ करवाया।

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