Tuesday , December 19 2017

इसराफ़ के सबब मुस्लिम मुआशरे के हालात संगीन

हैदराबाद 22 जून ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने कहा कि अगर मुस्लमान शादीयों को आसान बना लें तो उनके लिए हर मुश्किल आसान हो जाएगी।

हैदराबाद 22 जून ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने कहा कि अगर मुस्लमान शादीयों को आसान बना लें तो उनके लिए हर मुश्किल आसान हो जाएगी।

मुस्लिम शादीयों में इसराफ़, फुज़ूलखर्ची, बनावट के बाइस हालात संगीन होते जा रहे हैं, जिस का असर हमारी मईशत पर हो रहा है। वो टोली चौकी के एस ए इम्पिरियल गार्डन में 42 वीं दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम के सिलसिले में वालिदैन और सरपरस्तों को मुख़ातिब कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि लालच, हिर्स-ओ-हवस और झूटी शान-ओ-शौकत जैसी बुराईयों ने हमारी ख़ुशीयों को बेरंग बनादिया है। अपने बच्चों की शादियां तै करने में हम ग़ैर इस्लामी तर्ज़ अमल इख़तियार किए हुए हैं।

उन्होंने कहा कि रमज़ान के मुक़द्दस महीने में दु बा दु प्रोग्राम मुनाक़िद करने का मक़सद रिश्ते तै करने में अल्लाह की रहमतों और बरकतों से मुस्तफ़ीद होना है। उन्होंने वालिदैन और सरपरस्तों को मश्वरह दिया कि रमज़ान की इन मुबारक साअतों में अपने लड़के-ओ-लड़कीयों की शादी के इंतेख़ाब में इस्लामी जज़बे को बुनियाद बनाईं और शराफ़त-ओ-किरदार को रिश्ते के इंतेख़ाब का मयार बनाईं, उसी सूरत में हमारी ख़ानदानी ज़िंदगी में ख़ुशहाली और कामयाबी है। उन्होंने कहा कि जहेज़ और लेन देन के मुतालिबात घटिया और कमतर लोगों का वतीरा है, जबकि आली ज़र्फ़ी की अलामत ये हैके हम मुतालिबात की रस्म को क़तई तौर पर तर्क करदें।

ज़ाहिद अली ख़ां ने दो हज़ार से ज़ाइद वालिदैन-ओ-सरपरस्तों के इजतेमा को मुख़ातिब करते हुए कहा कि सियासत-ओ-एम डी एफ़ का मक़सद यही हैके शादी बियाह में आसानीयां पैदा की जाएं।

इस काम को ना सिर्फ़ अज़ला बल्कि दुसरे शहरों में भी वुसअत देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे उल्मा किराम-ओ-मशाइख़ उज़्ज़ाम ने भी मुस्लिम नौजवानों की तर्बीयत को ज़रूरी क़रार दिया है। इस्लाम से दूरी के बाइस नौजवानों में ग़ैर इस्लामी लिबास और मग़रिबी तर्ज़-ए-ज़िदंगी को बढ़ावा मिल रहा है।

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