इस्तिक़बाल रमज़ान, ग़ुस्ल ए काअबा की रूह परवर तक़रीब

इस्तिक़बाल रमज़ान, ग़ुस्ल ए काअबा की रूह परवर तक़रीब
इस्तिक़बाल रमज़ान के सिलसिले में सऊदी अरब के शहर मक्का मुकर्रमा में ख़ाना काअबा को ग़ुसल देने की रूह परवर तक़रीब हुई। इस तक़रीब में हज़ारों मन अर्क़ गुलाब और आब-ए-ज़म ज़म इस्तिमाल किया गया। मक्का मुकर्रमा के गवर्नर शहज़ादा मशाल बिन अब

इस्तिक़बाल रमज़ान के सिलसिले में सऊदी अरब के शहर मक्का मुकर्रमा में ख़ाना काअबा को ग़ुसल देने की रूह परवर तक़रीब हुई। इस तक़रीब में हज़ारों मन अर्क़ गुलाब और आब-ए-ज़म ज़म इस्तिमाल किया गया। मक्का मुकर्रमा के गवर्नर शहज़ादा मशाल बिन अबदुल्लाह समेत शाही ख़ानदान के दीगर अफ़राद ने काअबातुल्लाह को ग़ुसल देने की सआदत हासिल की।

हरम इंतिज़ामीया के सरबराह और इमाम डाक्टर शेख़ अबदुर्रहमान अलसदीस, आला सऊदी हुक्काम भी इस मौक़े पर मौजूद थे। ग़ुसल की तक़रीब से पहले शाही ख़ानदान के अफ़राद ने तवाफ़ काअबा किया। काअबा तुल्लाह की अंदरूनी दीवारों को अर्क़ गुलाब और दीगर ख़ुशबूओं में भीगे हुए सफेद कपड़े से साफ़ किया गया जबकि फ़र्श को आब-ए-ज़म ज़म और अर्क़ गुलाब बहा कर खजूर के पत्तों और हथेलियों से साफ़ किया गया।

इस दौरान ख़ाना काअबा का दरवाज़ा डेढ़ से दो घंटे खुला रहा। तक़रीब ग़ुसल के दौरान ख़ाना काअबा के चारों जानिब पैरा मिल्ट्री फ़ोर्स और दीगर सेक्योरिटी हुक्काम का सख़्त पहरा रहा। ख़ाना काअबा के अंदरूनी हिस्से को साल में दो मर्तबा ग़ुसल दिया जाता है। रमज़ान की आमद से पहले और नए हिज्री साल के आग़ाज़ पर जबकि ग़िलाफ़-ए-काअबा की तब्दीली हर साल 9 ज़िलहिज़्ज़ा को होती है |

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