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इस्मत रेज़ि के नाबालिग़ मुजरिम की रिहाई में ताख़ीर

नई दिल्ली: 16 दिसम्बर की इजतिमाई इस्मत रेज़ि की मुतास्सिरा लड़की के मग़्मूम वालदैन ने लम्हा आख़िर की कोशिश करते हुए नाबालिग़ मुजरिम की रिहाई में ताख़ीर के लिए दिल्ली ख़वातीन कमीशन के ओहदेदारों पर-ज़ोर दिया। जब कि वो सुप्रीमकोर्ट से बाहर आरहे थे।

मुतास्सिरा के वालिद बदरी सिंह पांडे ने कहा कि जहां तक मुताल्लिक़ा मुजरिम की रिहाई का ताल्लुक़ है हम बेबस हैं हमारी हुकूमत चाहे वो मर्कज़ी हो या रियासती सिर्फ आपकी बात सुनती है जब कि आप एहतेजाज करते हैं और लाठी चार्ज का निशाना बनते हैं वर्ना उन्हें कोई परवाह नहीं होती।

मुतास्सिरा की वालिदा आशादेवी ने कहा कि अगर नाबालिग़ मुजरिम रिहा होजाता है तो फिर अदालत की समात का क्या मतलब है कुछ भी नहीं। तमाम लोग जानते है कि वो रिहा होने के बाद क्या करेगा। क्या माज़ी के तीन साल में उसे ऐसी कार्रवाई से आइन्दा रोकने के कोई इक़दामात किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए में इन्साफ़ चाहती है। एक और इत्तेला के बमूजब ख़वातीन की हुक़ूक़ के कारकुनों की नाबालिग़ मुजरिम की रिहाई के बारे में राय मुनक़सिम है बाज़ चाहते है कि उसे एक मौक़ा दिया जाना चाहिए कि वो ख़ुद को बेहतर बनाएँ जब कि दीगर अफ़राद उसे सख़्त तरीन सज़ा देने के मुतालिबे कर रहे हैं।

16दिसम्बर 2012 को जो कुछ हुआ इंतेहाई बद बख्ताना था लेकिन ये नोट करना भी अहम है कि ऐसे नाबालिग़ अफ़राद को बालिग़ अफ़राद इस्तिहसाल का शिकार बनाते हैं। कवीता कृष्णन सेक्रेटरी कुल हिंद तरक़्क़ी-पसंद ख़वातीन एसोसीएशन‌ ने कहा कि उनके ख़्याल में लड़के को ज़िंदा रहने का एक मौक़ा दिया जाना चाहिए।

ए आई एस ए की कारकुन सुचेता ने कहा कि नाबालिग़ मुजरिम की रिहाई के ख़िलाफ़ मुहिम चलाई जानी चाहिए। उन्होंने हक़ायक़ को महसूस करने वाले हर शख़्स से अपील की कि वो हक़ीक़ी मसाइल को पेश-ए-नज़र रखें और इस्मत रेज़ि के मुक़द्दमात के मुजरिमों के ख़िलाफ़ जद्द-ओ-जहद में क्या मुश्किलात पेश आती हैं उन्हें भी ज़हन में रखें।

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