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‘इस्लामी आतंकवाद’ के खिलाफ एक ठोस नीति की जरूरत: सुब्रमण्यम स्वामी

थाने। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि देश में अराजकता की स्थिति पैदा करने और समुदायों के बीच भेदभाव पैदा करने के लिए जिम्मेदार ‘इस्लामी आतंकवाद’ से एक मज़बूत ढंग से निपटने के लिए एक तय सत्यापित नीति सेट करने की जरूरत है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार डॉ। स्वामी ने यहां डीवीडी सावरकर लेक्चर सिरीज़ को संबोधित करते हुए कहा कि “हमें और अधिक नहीं समझना चाहिए। यह एक अंतिम स्ट्राइक है और हमें आतंकवाद से निपटने के लिए एक सख्त और निश्चित नीति का निर्धारण करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अपनी मजबूरियां हैं। वह सेना, आईएसआईएस और तालिबान के नियंत्रण में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में एल टी डी, तमिल टाइगर्स, बोड़ो और माओवादियों से सफलतापूर्वक लोहा लिया गया है और हम इसी तौर पर ‘इस्लामी आतंकवाद’ से लड़ेंगे और उसे देश से बाहर ख़देडैंगे।
उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए। आईएसआईएस अब दक्षिणी राज्यों में सक्रिय है और निश्चित नीति के तहत इस पर भी नियंत्रण करना है। सरदार पटेल को भारत रत्न के लिए खुद क्रेडिट लेते हुए भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में यह सिफारिश की थी, जबकि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में ऐसा कुछ भी नहीं किया था।
मुद्रा के मोर्चे पर उठाए जाने वाले कदम सराहनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका परिणाम कुछ समय बाद सामने आएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वित्त मंत्रालय की ऐसे बड़े काम के लिए तैयारी अच्छी नहीं थी। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि मुद्रा के मोर्चे पर अगर पिछले चार महीने से तैयारी की जा रही थी तो एटीएम में बदलाव क्यों नहीं की गई।

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