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इस्लामी एहकाम की पाबंदी बुज़ुर्गों को सच्चा खिराज़े अक़ीदत

सैयद शाह हयात अहमद खुलूस के पैकर थे। उन्होने पूरी ज़िंदगी खिदमते ख़लक़ और दिनी व रूहानी तालीम में गुज़ार दी । आज भी उनकी रूहानी तलीमात की ज़या पाशियां ख़ानक़ाह हयातिया अम्थ्वा शरीफ़ में मौजूद हैं। उनकी खयालात का इज़हार तहरीक पैगाम इस्लाम

सैयद शाह हयात अहमद खुलूस के पैकर थे। उन्होने पूरी ज़िंदगी खिदमते ख़लक़ और दिनी व रूहानी तालीम में गुज़ार दी । आज भी उनकी रूहानी तलीमात की ज़या पाशियां ख़ानक़ाह हयातिया अम्थ्वा शरीफ़ में मौजूद हैं। उनकी खयालात का इज़हार तहरीक पैगाम इस्लाम मागधी ज़ोन के कोंवेनर मौलाना शमीम बरकाती मिसबाही ने सैयद शाह हयात अहमद की दूसरी बरसी पर मुनक्कीद एक मिलाद में कहें।

उन्होने बुज़ुर्गाने दीन की अदात व खसायल पर बहस करते हुये कहा कि अल्लाह के वली के आमाल फ्रायज व नवाफ़िल से कभी गाफिल नहीं होते। उन्होने कहा कि बुज़ुर्गाने दीन से सच्चा अक़ीदत इसी वक़्त समझी जाएगी जब आप इस्लामी एहकमात के पाबंद होंगे। लोगों से एखलाक़ से पेश आए और खिदमते ख़लक़ को मुहब्बत के जज़्बे से आम करें और अपनी ज़िंदगी में उतारें। यही बुज़ुर्गों कि सच्ची अक़ीदत है। इस मौके पर सैयद शाह इरफान अहमद सहजादा नशीं ख़ानक़ाह के इलावा रियासती हज कमेटी के रुक्न और जेडीयू रहनुमा सैयद मेराज अहमद और सैयद सुल्तान अहमद मौजूद थे। मुल्क में सलामती कि दुआ के साथ महफ़ील एख्तेताम को पहुंची।

आखिर में सैयद मेराज अहमद कि जानिब से उनके बेटे के अक़ीके के मौके पर दावत का एहतेमाम किया गया।

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