Thursday , December 14 2017

इस्लामी तर्ज़-ए-ज़िदंगी: बीमारीयों से बचाओ मुम्किन

बेनज़ीर भुट्टो शहीद हस्पताल रावलपिंडी के माहिर अमराज़ जिगर-ओ-मादा डाक्टर शहज़ादा मंज़ूर ने कहा है कि खाने पीने के इस्लामी उसूलों को अपनाकर हर शख़्स बीमारीयों से बच सकता है, भूक रख कर और तलब से कम खाना एक ऐसा अमल है जो शूगर, मोटापे और उन अ

बेनज़ीर भुट्टो शहीद हस्पताल रावलपिंडी के माहिर अमराज़ जिगर-ओ-मादा डाक्टर शहज़ादा मंज़ूर ने कहा है कि खाने पीने के इस्लामी उसूलों को अपनाकर हर शख़्स बीमारीयों से बच सकता है, भूक रख कर और तलब से कम खाना एक ऐसा अमल है जो शूगर, मोटापे और उन अमराज़ के नतीजा में पैदा होने वाले अमराज़ से बचाओ की बेहतरीन और बे बदल तदबीर है।

उन्हों ने कहा कि बाज़ारी खाने यरक़ान समेत दीगर बीमारीयों को जन्म देते हैं इसलिए लोगों को बाज़ार के खानों, बिलख़सूस खुली जगहों पर पड़े हुए खानों से परहेज़ करना चाहीए ताकि वो बीमारीयों से महफ़ूज़ रह सकें। मदीना मुनव्वरा में किसी मफ़्तूहा मुल़्क की जानिब से बतौर तोहफ़ा एक हकीम रवाना किए गए थे लेकिन कई महीनों के बाद उन्होंने ख़लीफ़ा इस्लाम से शिकायत की कि इन के पास एक भी मरीज़ नहीं आया।

ख़लीफ़ा ने हंसते हुए कहा कि ये मुस्लमानों के सादा ग़िज़ाएं इस्तेमाल करने की तर्ज़-ए-ज़िदंगी की वजह से है कि वो बीमार नहीं होते।

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