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इस्लामी माहौल में बच्चों की तालीम-ओ-तर्बीयत नागुज़ीर: मौलाना अबदुलकरीम

खम्मम, 01 अप्रेल: बरोज़ हफ़्ता 30 मार्च बाद नमाज़े मग़रिब खम्मम के ज़हीर पूरा मुहल्ला निज़द मस्जिदे अक़सा चौराहा पुर मदरसा इस्लामिया दारुल‌उलूम खम्मम के ज़ेरे एहतिमाम अज़ीमुश्शान जलसा बउनवान दीनी माहौल की ज़रूरत‍ और‌ इफ़ादियत मुनाक़िद किय

खम्मम, 01 अप्रेल: बरोज़ हफ़्ता 30 मार्च बाद नमाज़े मग़रिब खम्मम के ज़हीर पूरा मुहल्ला निज़द मस्जिदे अक़सा चौराहा पुर मदरसा इस्लामिया दारुल‌उलूम खम्मम के ज़ेरे एहतिमाम अज़ीमुश्शान जलसा बउनवान दीनी माहौल की ज़रूरत‍ और‌ इफ़ादियत मुनाक़िद किया गया, इस जलसे की सरपरस्ती हाफ़िज़ मुहम्मद अहमद इमाम-ओ-ख़तीब मस्जिद अक़‌सा ने की। जलसे से मौलाना अबदुलकरीम रशादी ख़तीब मस्जिद क़िला ने अपने ख़िताब में कहा के इस्लामी माहौल में तलबा की तर्बीयत नागुज़ीर है, तलबा की तर्बीयत में वालदैन का बहुत बड़ा दख़ल होता है लिहाज़ा वालदैन पर ये ज़िम्मेदारी आइद होती है कि अपने बच्चों को दुनयवी तालीम के साथ साथ दीनी तालीम से भी आरास्ता करने की ज़रूरत है दीन की बुनियादी बातों से अपने बच्चों को वाक़िफ़ करवाना अशद ज़रूरत है।

मुआशरे में फैली हुई बुराइयों के सद बाब के लिए इजतिमाई जद-ओ-जहद नागुज़ीर है, वालदैन पर ये ज़िम्मेदारी आइद होती है कि वो अपने बच्चों की तर्बीयत दीनी माहौल के अंदर करें ताकि तलबा का मुस्तक़बिल दुनियां-ओ-आख़िरत में कामयाब हो और बच्चे अपने वालदैन के हक़ में नजात का ज़रिया बनें। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बच्चों की तालीम-ओ-तर्बीयत के सिलसिले में तफ़सील के साथ अहादीस के ज़रिये उम्मत को जो पैग़ाम दिया इस पर अमल आवरी में ही कामयाबी है, पैग़ंबर ने फ़रमाया बच्चे को सात साल की उम्र से ही नमाज़ की तरग़ीब देने की हिदायत दे‍ ताकि बच्चा बलूग़ की उमर को पहुंचने तक वो नमाज़ों का पाबंद हो जाये।

वालदैन की ये ज़िम्मेदारी है कि अपने बच्चों की इस्लामी माहौल में तर्बीयत के लिए अनथक जद-ओ-जहद करे‍, एक फ़र्द की इस्लाह एक शख़्स की इस्लाह के मुमासिल है, इस के बिलमुक़ाबिल एक औरत की इस्लाह तमाम ख़ानदान की इस्लाह के बराबर है। मौलाना ने अपने ख़िताब को जारी रखते हुए कहा कि माओं पर ये ज़रूरी है कि वो अपनी बच्चियों की इस्लामी माहौल में तर्बीयत देने पर ज़ोर दिया इस लिए कि एक औरत की इस्लाह तमाम ख़ानदान की इस्लाह के बराबर है, जलसे में मौजूद पसेपर्दा ख़वातीन पर ज़ोर देते हुए कहा कि औरत की बदौलत ही उसका घर दीनदार बन सकता है, अगर औरत दीनदार होगी तो उसका ख़ावि‍द और बच्चे भी दीनदार होंगें। रसूलुल्लाह सल्ल‌ल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरतों के मुक़ाम को उजागर करते हुए फ़रमाया कि औरत घर की ज़ीनत है और अल्लाह तआला ने ख़वातीन को ये हुक्म दिया कि वो अपने घरों में क़रार के साथ रहें, और मर्दों को अल्लाह तबारक‍ व‌ तआला ने औरतों पर हाकिम बनाया ताकि उनकी दुनियावी ज़रूरियात के साथ साथ दीनी माहौल में उनकी तर्बीयत करें।

सदर जलसा मौलाना सईद अहमद क़ासमी सदर जमइयतुल उलमा ज़िला खम्मम ने अपने सदारती ख़िताब में कहा कि आज मुआशरे में जो बिगाड़ है उसे दूर करने की ज़रूरत है आए दिन नए फ़ितनों से उम्मत के नौनिहाल मुतास्सिर हो रहे हैं। वालदैन की ये ज़िम्मेदारी है कि वो अपने बच्चों की सही नहज पर तर्बीयत कर के उन्हें कामयाब बनाएं। मौलाना ने आख़िर में इस अज़ीमुश्शान जलसे के इनइक़ाद पर अहलेयान मुहल्ला ज़हीर पूरा,‍और‌ नौजवानान ज़हीर पूरा की सताइश करते हुए कहा कि इस किस्म के इजलासों की अशद ज़रूरत है, इस मौक़े पर मौलाना साबिर अहमद इशाअती, मौलाना अबदुलग़नी ने भी ख़िताब किया, जलसे में अवाम की कसीर तादाद शरीक थी और ख़वातीन की भी कसीर तादाद जलसा में शरीक हो कर उल्मा किराम के बयानात से इस्तिफ़ादा किया।

जलसे का आग़ाज़ हाफ़िज़ सुफ़ियान की क़िरते कलाम पाक से हुआ, नाते शरीफ़ इमतियाज़ ने पढ़ी,मुंतज़मीन जलसा शेख़ बाबू मियां , शेख़ मौलाअली, शेख़ मस्तान, शेख़ इबराहीम, मुहम्मद अज़ीज़, मुहम्मद ज़हीर,मीराँ हुसैन, महबूब, शेख़ क़ासिम , शेख़ मीराँ ने जलसे की तैयारी में बढ़ चड़ कर हिस्सा लिया और तमाम शुरका ने ताम का नज़म किया।

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