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इस्लाम में संगीत हराम नहीं : इमाम मस्जिदे क़ुबा

An Iranian musician from Tehran Symphony Orchestra pauses while performing Symphony, "Messenger of Love and Hope" at Vahdat hall in central Tehran August 15, 2007. REUTERS/Morteza Nikoubazl (IRAN) - RTR1STAR

मदीना: मदीना की ऐतिहासिक मस्जिद “क़ुबा” के इमाम शेख सालेह अलमगामसी ने कहा है कि इस्लाम में संगीत हराम या वर्जित नहीं है। उन्होंने बताया कि वह संगीत की बात कर रहे हैं गाना गाने का नहीं और गाना हराम है।

वह एम बी सी चैनल के एक टॉक शो में बात कर रहे थे। यासिर उमरो उस टॉक शो को होस्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि ” लोगों का आविष्कार और नवाचार की सख्त जरूरत है। मैं इसमें विश्वास रखता हूँ, चाहे लोग मेरा दृष्टिकोण स्वीकार करें या नहीं। ‘

इस शो में उन्होंने संगीत सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि मैं इस मुद्दे पर किसी आलोचना का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूँ। जहां तक संगीत का संबंध है. तीन मुस्लिम विद्वानों ने विभिन्न चीजों का उल्लेख किया है. जबकि उनमें अधिक का इस पर सहमति है कि यह गाना बजाना है जिसका कुरान में हवाला दिया गया है और संगीत नहीं. संगीत वचन नहीं, उपकरण है और उनका कुरान में सराहतन हवाला नहीं दिया गया है। ”

उन्होंने अपनी बातचीत में कहा कि ” आज के दौर में महिलाएं और पुरुष एक साथ मिलकर गाते हैं और यह वर्जित है. मुझ से मोबाइल फोन में संगीत के बारे में पूछा जाता है। इसमें महत्वपूर्ण बात लोगों को पापी करना है और संगीत के मुद्दे को इस तरह पेश करके बयान करना है जैसे यह हमारी मूल कारण या जीवन का लाज़िमी कोई चीज़ है। ”

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