Thursday , December 14 2017

इस्लाम में ख़वातीन की बुलंद-ओ-बाला अज़मत

इस्लाम ने औरत को समाज में एक बेहतरीन मुक़ाम अता करके उसकी इज़्ज़त में इज़ाफ़ा किया है। मुहतरमा नासिरा ख़ानम नाज़िमा शोबा ख्वातीन आंधरा प्रदेश ने महबूबनगर के अलमास फंक्शन हाल में जलसा सीरतुन्नबी(स०अ०व०.) बराए ख्वातीन से ख़िताब करते हुए क

इस्लाम ने औरत को समाज में एक बेहतरीन मुक़ाम अता करके उसकी इज़्ज़त में इज़ाफ़ा किया है। मुहतरमा नासिरा ख़ानम नाज़िमा शोबा ख्वातीन आंधरा प्रदेश ने महबूबनगर के अलमास फंक्शन हाल में जलसा सीरतुन्नबी(स०अ०व०.) बराए ख्वातीन से ख़िताब करते हुए किया।

उन्हों ने कहा कि इस्लाम ने बेटी की बेहतरीन तरबियत पर जन्नत की बशारत, बेहतरीन बीवी को नेअमत और माँ के क़दमों तले जन्नत कह कर औरत की अज़मत को बुलंद-ओ-बाला कर दिया है। आज समाज में औरत की आज़ादी के नाम पर औरतों को घरों से निकाल कर फैशन परस्ती, आज़ादी का नारा के ज़रीया औरत का सुकून छीन लिया है।

हर इश्तेहार टी वी पर औरतों की ब्रहना तसावीर पेश करके औरत की नामूस को तार तार किया जा रहा है। औरतों को शैतान के एजैंटों से ख़बरदार रहने की ज़रूरत है। मुहतरमा नासिरा ख़ानम ने कहा कि लड़कियां दीनी तालीम के साथ आला असरी तालीम भी हासिल करें, मगर इस्लामी तहज़ीब-ओ-तमद्दुन को थामे रखें।

आजकल मुस्लिम लड़कियों की गैर मुस्लिम लड़कों के साथ इश्क़-ओ-आशिक़ी और शादी ब्याह के वाक़्यात मंज़रे आम पर आ रहे हैं। ये दरअसल दीन इस्लाम से अदम वाक़फ़ियत का नतीजा है। इमान चला गया तो दुनिया-ओ-आख़िरत की ज़िंदगी नाकाम हो जाएगी। माएं घरों में अपनी बच्चियों को इस्लामी माहौल पर अमल करने की तरफ़ राग़िब करें और ख़ुदा और इस के रसूल (स्०अ०व्०) के तरीके पर कारबन्द रहने की तलक़ीन करें।

मुहतरमा मेराज सुलताना ज़िलई नाज़िमा ने इफ़्तेताही कलिमात में कहा कि सीरत उन्नबी(स०अ०व०.) के जलसों के ज़रीया जमात-ए-इस्लामी मुहतरमा नसीम सुलताना ने तिलावत-ए-क़ुरआन की और तर्जुमानी पेश की। मुहतरमा फ़ाइक़ा इशफ़ाक़ नाज़िम शहर हैदराबाद ने भी जलसा से ख़िताब किया।

रिज़वाना बेगम, सर्वर जहां बेगम ने हम्द-ओ-नाअत पेश की। मुहतरमा हुमैरा निशात ने कन्वीनर के फ़राइज़ अंजाम दीए।

TOPPOPULARRECENT