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इस्लाम वाहिद मिसाली, फ़ित्री और हक़ीक़ी धर्म‌ है

मेने मज्हब के असल मफ़हूम को समझने के लिए अपने ज़मीर और दिली जज्बात का बग़ौर जायज़ा लिया है। लिहाज़ा अब में ये कह सकता हूँ कि एक अहम नुकता जो मेरी समझ में आया, वो ये है कि दुनिया भर में ईसाई मज्हब जिस शक्ल में इस वक़्त मौजूद है, वो सरासर मुनाफ़

मेने मज्हब के असल मफ़हूम को समझने के लिए अपने ज़मीर और दिली जज्बात का बग़ौर जायज़ा लिया है। लिहाज़ा अब में ये कह सकता हूँ कि एक अहम नुकता जो मेरी समझ में आया, वो ये है कि दुनिया भर में ईसाई मज्हब जिस शक्ल में इस वक़्त मौजूद है, वो सरासर मुनाफ़क़त पर मबनी है।

पहली बात ये है कि ईसाईयत में वहदत का उंसूर बिल्कुल नहीं पाया जाता। बेशुमार(बहुत) फ़िरक़े हैं और उन की तादाद में हर साल इज़ाफ़ा हो रहा है। इस वक़्त पूरी ईसाईयत एक बनावटी और ख़ुद साख़ता मज़हब है और चर्च का अवामुन्नास की भारी अक्सरीयत पर कोई इख़तियार नहीं। बर्तानिया का मज़हब मुआशरती हैसियत पर मबनी है और लोग समाजी हैसियत के हुसूल और उसे बरक़रार रखने के लिए चर्च जाते हैं।

इस्लाम के हैरतअंगेज़ और ख़ूबसूरत दिन (उसूलों) ने मेरे ज़हन को जो वुसत अता की है, वो में अल्फ़ाज़ में ब्यान नहीं कर सकता। ये मिसाली दीन फ़ित्री और हक़ीक़ी दिन लगता है। मेरे ख़्याल में ये कहना ज़रूरी नहीं कि मैंने इस दीन को मुकम्मिल तौर पर अपना लिया है और मैं बेहद मुसर्रत के साथ अज़ीम इस्लामी बिरादरी में शामिल होने की इजाज़त चाहता हूँ। (हामी उद्दीन हैरिस)

* इस्लामी इबादात सादगी और वक़ार का मज़हर हैं

आप अंदाज़ा करसकते हैं कि मुझे ये जान कर कितनी ख़ुशी हुई कि इस्लाम एक एसा धर्म‌ है, जिस की इबादात किसी भी वक़्त अदा की जा सकती हैं और उन में इतनी सादगी और वक़ार है कि इंसान उन इबादात के ज़रीया अल्लाह ताला से मुख़ातब होकर एक अजीब सी मुसर्रत महसूस करता है। (जी फ़टज़ जेराल्ड)

इस्लाम दुनिया के मसाइल हल करसकता है
हिंदूस्तान में क़ियाम के दौरान मेरा मुसल्मानों से मिलना-जुलना रहा। मैंने उन्हें मज्हबी और दुन्यवी हर लिहाज़ से बेहद वफ़ादार पाया, जिस के नतीजे में मेने ईसाईयत और इस्लाम का मुवाज़ना किया तो ये मालूम हुआ कि इस्लाम दुनिया के मसाइल हल करने की ज़्यादा सलाहीयत का हामिल है और ईसाईयत की निसबत ये इंसान की रुहानी ज़रूरीयात की बेहतर तौर पर तकमील और तश्फ़ी करता है। (जी ऐच एफ़। साउथ सी हिऩ्ट्स)

* इस्लाम एक साफ़ सुथरा और सही उल-अक़ीदा धर्म‌ है
ईसाईयत के कई बुनियादी उसूलों से अदम इत्मेनान के बाइस मेने क़ुरान हकीम का मुताला किया। इस्लाम एक साफ़ सुथरा और सही उल-अक़ीदा दिन है और इंसान की नजात को (नऊ ज़‍बिल्लाह) अल्लाह के किसी बेटे की क़ुर्बानी से वाबस्ता करने की बजाए फ़राइज़ की अदायगी पर मुनहसिर ठहराता है। (जीवटी टायलर)

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