इस मुस्लिम बाहुल इलाके के मदरसे में 60% पढ़ते हैं हिन्दू बच्चे!

इस मुस्लिम बाहुल इलाके के मदरसे में 60% पढ़ते हैं हिन्दू बच्चे!

कोलकाता : भारत में राजनीतिक तौर पर मदरसों को निशाना बनाया जाता है। दक्षिणपंथियों की और से कभी इन मदरसों को रूढ़िवाद से जोड़ दिया जाता है। तो कभी इनके रिश्ते आतंकवाद से जोड़ दिये जाते है। बावजूद देश की कई महान हस्तियों ने अपने जीवन की शुरुआत ही मदरसों से की है। लेकिन इसी बीच प बंगाल के पूर्वी बर्धमान के मुस्लिम बाहुल इलाके के अगोरदंगा मदरसा केतुग्राम में 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे हिन्दू हैं। 900 छात्रों में से लगभग 60 प्रतिशत हिंदू सद्भावना की मिसाल हैं। यही नहीं तीन हिंदू लड़कियों ने वेस्ट बंगाल माध्यमिक बोर्ड में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। टेलीग्राफ में छपी खबर के अनुसार पियूपिया शाहा, साथी मोदक और अर्पिता साहा ने 800 अंकों में से 730 (91.25 प्रतिशत),730 और 739 (92.38 प्रतिशत) हासिल किए। जिले में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने के अलावा इन लड़कियों इस्लामिक इतिहास के विषय में भी अच्छे अंक प्राप्त किए हैं। पियूपिया को इस विषय में 95 साथी को 92 और अर्पिता को इस विषय में 93 अंक मिले हैं। केतुग्राम के लोग लड़कियों की सफलता पर जश्न मना रहे हैं। पियूपिया के पिता रामेश्वर कहते हैं कि जब मुस्लिम बच्चे स्कूल जाते हैं जबकि स्कूल मदरसा नहीं है तो फिर हमें अपने बच्चियों को इस्लाम परिचय पढ़ाने में क्यों दिक्कत होनी चाहिए?

पियूपिया का कहना है कि उसके साथ टीचर काफी अच्छे से बर्ताव करते थे और उसकी काफी मदद करते थे। इसके अलावा अर्पिता का कहना है कि वह हिंदू रीति रिवाजों को लेकर पहले से ही काफी अभयस्त है लेकिन वह अन्य धर्म के बारे में भी जानना चाहती है, इस्लाम के बारे में जानने से उसे नई चीजें पता चलीं। यह पढ़ाई की बोझ की तरह बिल्कुल नहीं था। पियूपिया और साथी सिविल सर्विसेज करना चाहती हैं जबकि अर्पिता नर्स बनने की हसरत रखती हैं।

केतुग्राम बीरभूम में अजय नदी किनारे स्थित है। यहां 46.77 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है। 2011 की जनगणा के मुताबकि बंगाल की साक्षरता दर 76.26 है और दूर दराज के इस गांव की साक्षरता दर 68 प्रतिशत है। यहां के निवासियों का कहना है कि उनके घर से सेकेंड्री स्कूल 6 किलोमीटर की दूरी पर हैं जिस वजह से वह अपने बच्चों को इतनी दूर पड़ने नहीं भेज पाते हैं। अर्पिता के पिता कहते हैं कि अपनी बच्ची को इतनी दूर भेजने के लिए सोचना पड़ता है। करीब-करीब मदरसे के 900 बच्चों में 60 प्रतिशत बच्चे हिंदू हैं। मार्च में रैली के दौरान अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस पर शिक्षा बजट को लेकर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था। अमित शाह ने कहा था कि ममता दीदी ने मदरसों के लिए 4000 करोड़ का बजट आवंटित किया है हमें उससे दिक्कत नहीं है लेकिन उच्च शिक्षा के लिए आवंटित बजट चार हजार करोड़ से कम है।

बंगाल अल्पसंख्यक मामलों के अधिकारी बताते हैं कि बंगाल सरकार मदरसों पर सलाना 250 करोड़ रुपए खर्च करती है। 2019-2020 के लिए शिक्षा के लिए सरकार ने 3000 करोड़ का बजट आवंटित किया है। ऐसे में 4000 करोड़ रुपए शिक्षा के आवंटित करने का कोई सवाल ही नहीं है। पश्चिम बंगाल आई मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अबू कहर कमरुद्दीन का कहना है कि हिंदू छात्रों को मदरसे में पढ़ाना सद्भाव का प्रतीक है।पिछली साल से इस साल हिंदू छात्र-छात्रों के मदरसों में जाने की संख्या में 4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

पश्चिम बंगाल आई मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अबू ताहिर कमरुद्दीन का कहना है कि राज्य सरकार सालाना मदरसा शिक्षा पर 250 करोड़ रुपये खर्च करती है। “वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विभाग के पास लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बजट है। इसलिए, मदरसों पर 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने का कोई सवाल ही नहीं है। ‘कई लोगों ने कहा कि मदरसों में पिछड़े क्षेत्रों में हिंदू लड़कियों के अध्ययन से यह साबित होता है कि राज्य सरकार का खर्च शिक्षा के प्रसार में मदद कर रहा है। अबू ताहिर कमरुद्दीन ने कहा कि “बंगाल में मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्रों का रुझान बढ़ रहा है – जो राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव का एक अच्छा संकेत है। पिछली साल से इस साल हिंदू छात्र-छात्रों के मदरसों में जाने की संख्या में 4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

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