इज़राईली यूनीवर्सिटी तलबा-ए-यूनीयन के इंतेख़ाबात

इज़राईली यूनीवर्सिटी तलबा-ए-यूनीयन के इंतेख़ाबात
यरूशलम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के तालिब-ए-इल्म को नुमाइंदगी का एज़ाज़

यरूशलम

अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के तालिब-ए-इल्म को नुमाइंदगी का एज़ाज़

अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी ( ए एमयू ) के एक तालिब-ए-इल्म को इज़‌राईल की मशहूर हीब्रू यूनीवर्सिटी में 80 ममालिक के तक़रीबा 2000 गैर मुल्की तलबा-ए-की नुमाइंदगी करनेवाली तलबा-ए-यूनीयन में मुंतख़ब किया गया है। वो इस ओहदा पर मुंतख़ब होने वाले पहले हिन्दुस्तानी हैं।

ए एम यू के रिसर्च स्कालर ज़ुल्फिक़ार सेठ (7 )उस वक़्त हीब्रू यूनिवर्सिटी के रोथबरग इंटरनेशनल स्कूल ( आर आई एस ) में वज़ीटिंग रिसर्च फैलो हैं। उन्हें हाल ही में होने वाले यूनियन के इंतेख़ाबात में मुंतख़ब किया गया । गुजरात में साबिर कानठा ज़िला के हिम्मत नगर शहर के रहने वाले ज़ुल्फिक़ार ने कहा कि इन का मुसलमान होना इंतेख़ाबात में कभी कोई मौज़ू नहीं रहा और उन्होंने यूनिवर्सिटी अहाते में किसी भी तरह का इम्तियाज़ महसूस नहीं किया और तमाम लोगों ने उन के साथ अच्छा बरताव‌ किया।

उन्होंने कहा कि इस से इज़‌राईल में जम्हूरियत और साथ ही आलमी बिरादरी की खुली सोच का पता चलता है। मै मुस्लमानों से भी अपील करना चाहता हूँ कि वो समझें कि आज भी सैकूलर और लिबरल मुसलमानों के लिये ( दुनिया में ) काफ़ी जगह है। कोर्स का हिस्सा बनने के बाद सिर्फ़ ढाई माह में ही ज़ुल्फिक़ार हीब्रू यूनिवर्सिटी अहाते में एक मक़बूल हस्ती बन कर उभरे हैं। ज़ुल्फिक़ार ने कहा कि मैं ने इलेक्शन लड़ने के बारे में नहीं सोचा था लेकिन जब मुझे पता चला कि अब तक कोई भी हिन्दुस्तानी इस ओहदे के लिये मुंतख़ब नहीं हुआ तो मैने सोचा कि ये वक़्त हिन्दुस्तान के लिये अच्छा है।

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