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ईदगाह मीर आलम के उक़्बा हिस्सा में वसीअ और अरीज़ अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़ा!

शहर हैदराबाद को ख़ूबसूरत झीलों का शहर कहा जाता है और उन झीलों के ज़रीए तक़रीबन चार सौ बरसों से अवाम पानी हासिल कर रहे हैं। इस तरह ये झीलें अवाम की प्यास बुझाने का काम करती हैं।

शहर हैदराबाद को ख़ूबसूरत झीलों का शहर कहा जाता है और उन झीलों के ज़रीए तक़रीबन चार सौ बरसों से अवाम पानी हासिल कर रहे हैं। इस तरह ये झीलें अवाम की प्यास बुझाने का काम करती हैं।
लेकिन अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि लैंड ग्रैबरों ने बाअसर और नापसंदीदा अफ़राद की सरपरस्ती में अक्सर झीलों के मुँह मिट्टी से बंद कर दीए हैं और झीलों के वजूद को मिट्टी के ढेरों में दबाकर वहां बस्तियां आबाद कर दी हैं।

क़ारईन! मीर आलम टैंक और इस से मुत्तसिल ईदगाह मीर आलम को कौन नहीं जानता? रियासत के कोने-कोने के लोग बल्कि कर्नाटक , महाराष्ट्रा , तमिलनाडू और उड़ीसा के मुसलमान भी 200 साल से ज़ाइद क़दीम ईदगाह मीर आलम के बारे में अच्छी तरह जानते हैं जहां हर साल ईदैन के मौक़ा पर लाखों फ़र्ज़ंदाने इस्लाम नमाज़ अदा करते हैं।

और वक़्त उन नूरानी मनाज़िर का ज़ाइद अज़ 200 बरसों से नज़ारा कर रहा है। जहां तक मीर आलम टैंक का सवाल है उसमान सागर और हिमायत सागर की तामीर से क़ब्ल ये हैदराबादियों की पानी की ज़रूरियात की तकमील करता था।

1804 ता 1808 तक हैदराबाद दक्कन के वज़ीरे आज़म की हैसियत से ख़िदमात अंजाम देने वाले मीर आलम बहादुर से मौसूम इस झील को आसिफ़ जाह सोम नवाब मीर अकबर अली ख़ान सिकन्दर जाह के दौर में तामीर करवाया गया था और ख़ुद मीर आलम ने इस आबी ज़ख़ीरा का संगे बुनियाद 20 जुलाई 1804 को रखा था उस की तामीर दो साल में मुकम्मल हुई।

लेकिन शहर और इस के अतराफ़ और अकनाफ़ की झीलों और तालाबों और दीगर आबी ज़ख़ीरों की हिफ़ाज़त में सरगर्म एक गैर सरकारी तंज़ीम SOUL ( Save our urban lakes ) का कहना है कि लैंड ग्रैबर्स तेज़ी से आबी ज़ख़ाइर और झीलों को मिट्टी के ढेरों में छिपा कर बस्तियां बसा रहे हैं।

इस बात का भी पता चला कि इस अराज़ी पर हट्टे कट्टे पहलवानों को बिठा दिया गया है। जब कि इस से क़ब्ल वहां मौजूद कच्चे मकानात में मुक़ीम लोगों को डरा धमका कर हटा दिया गया इस अराज़ी में एक सरकारी ट्रांसफ़ॉरमर भी शामिल कर लिया गया।

वाज़ेह रहे कि 23 अक्टूबर 2000 को मुहम्मद फरीद उद्दीन की बहैसियत वज़ीर अक़लीयती बहबूद मीआद के दौरान ईदगाह में मीनारें नस्ब की गई थीं तौसीअ का काम किया गया था।

अब उक़्बा हिस्सा में किया गया काम भी इस अराज़ी में चला गया है। आर टी आई जहद कारों का कहना है कि 11वीं ज़ोनल डेवलप्मेन्ट प्लान एम सी एच एरिया के तहत मीर आलम के इस हिस्सा को तफ़रीही मुक़ाम भी बनाया जाने वाला था। अब देखना ये है कि ओहदेदार क्या कार्रवाई करते हैं।

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