Wednesday , July 18 2018

ईरान परमाणु समझौते से अलग होकर अमेरिका ने बड़ी गलती की है- फ्रांस PM

अमेरिका के ईरान के साथ परमाणु करार से बाहर निकलने के बाद इसके भविष्य को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि फ्रांस और जर्मनी ने इस करार को जारी रखने की बात कही है।

इमानुएल माक्रों का कहना है कि इलाके में स्थिरता को बचाए रखने के लिए यूरोप को 2015 के परमाणु करार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करने की जरूरत है। माक्रों ने कहा, “यूरोपीय फैसला हमें ईरान को तुरंत (परमाणु) गतिविधियां शुरू करने और तनाव को फैलने से रोकने में मदद करेगा। सबसे जरूरी है कि मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता रहे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ऐतिहासिक करार से बाहर निकलने का एलान करने के एक दिन बाद ही माक्रों ने कहा कि इस वक्त यूरोप बहुपक्षीय व्यवस्था का गारंटर है। माक्रों के मुताबिक, “यूरोप के लिए एक ऐतिहासिक लम्हे में हम खड़े हैं।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो बहुपक्षीय व्यवस्था बनाई गई और जब कभी कभी यह लड़खड़ा जाती है तो उसे कायम रखने की जिम्मेदारी यूरोप की है।

माक्रों से पूछा गया कि जब वो अमेरिकी दौरे पर थे तो उन्होंने ईरानी परमाणु करार को बचाने की कोशिश की थी, फिर वो नाकाम क्यों हो गए? इसके जवाब में माक्रों ने कहा, “मेरे ख्याल से सबसे जरूरी है मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता।

वॉशिंगटन में भी मैंने यही कहा था, मैं समझ गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप 2015 के करार से बाहर निकलना चाहते हैं और हमारी संयुक्त प्रेस वार्ता में मैंने सुझाव दिया कि हमें विस्तृत ढांचे पर काम करना चाहिए। मुझे इस फैसले पर बेहद अफसोस है।

मुझे लगता है कि यह गलती है. इसलिए जरूरी है कि हम यूरोपीय लोग 2015 के करार पर कायम रहें और (ईरानी) राष्ट्रपति रोहानी से भी मैंने यही कहा है।

2015 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्य और जर्मनी ने ईरान के साथ परमाणु करार किया था जिसके बाद ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियां बंद कर दीं और उस पर प्रतिबंधों में ढील दी गई। अब डॉनल्ड ट्रंप ने इस करार से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है।

माक्रों ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कहा, “सब कुछ खत्म मत करिए, अगर ये चीजें आपको चिंता में डालती हैं तो आइए इस ढांचे को मजबूत करते हैं और उन्होंने तनाव पैदा करने का फैसला किया।

मेरा ख्याल है कि उसे विस्तार दिया जाना चाहिए था, यह काम हम यूरोपीय देशों को करना है, यूरोपीय संघ, यूके, जर्मनी और फ्रांस को। हमें यह साबित करना होगा कि हम 2015 के करार से जुड़े हुए हैं ताकि ईरानी सरकार अपनी गतिविधियां ना शुरू करे।

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