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ई अहमद मुसलसल सातवें मर्तबा एम पी बनने के मुतमन्नी

मर्कज़ी वज़ीर और इंडियन यूनीयन मुस्लिम लीग के क़ौमी सदर ई अहमद के सियासी मुस्तक़बिल को गहन कोई नागहानी कैफ़ीयत ही लगा सकती है लेकिन वो केरला में हलक़ा लोक सभा मिलापो रुम से मुसलसल 7 वीं मर्तबा मुंतख़ब होने के लिए इंतेख़ाबी मैदान में क़

मर्कज़ी वज़ीर और इंडियन यूनीयन मुस्लिम लीग के क़ौमी सदर ई अहमद के सियासी मुस्तक़बिल को गहन कोई नागहानी कैफ़ीयत ही लगा सकती है लेकिन वो केरला में हलक़ा लोक सभा मिलापो रुम से मुसलसल 7 वीं मर्तबा मुंतख़ब होने के लिए इंतेख़ाबी मैदान में क़दम रख चुके हैं।

सियासी मुबस्सिरीन के मुताबिक़ इस हलक़े से उनका शानदार रिकार्ड रहा है। शुमाली केरला में मुस्लिम ग़लबा वाले हलक़े में नई हदबंदी से क़बल इसका नाम मनजीरी था। इंडियन यूनीयन मुस्लिम लीग के ई अहमद रियासत में कांग्रेस ज़ेरे क़ियादत हुकमरान यू डी एफ़ में दूसरी सब से बड़ी हलीफ़ पार्टी के सरबराह हैं।

रियासत में सियासी सूरत-ए-हाल इस मर्तबा थोड़ी मुख़्तलिफ़ है। यू डी एफ़ का 2004 में अमलन सफ़ाया हुआ था जैसा कि मुख़ालिफ़ यू डी एफ़ जज़बात पैदा हुए थे। वो 20 के मिनजुमला सिर्फ़ एक नशिस्त जीत सकी थी। उस वक़्त भी ई अहमद ने ही पार्लियामेंट में अपनी वाहिद नुमाइंदगी पेश की थी।

2009 के इंतेख़ाबात में भी उन्होंने इस हलक़े पर दुबारा क़बज़ा करलिया था। उन्हें मुतास्सिरकूण एक लाख से ज़ाइद वोट मिले थे। 1952 से पार्लियामेंट में सिर्फ़ मुस्लिम लीग के उम्मीदवार को पार्लियामेंट में भेजने का रिकार्ड रखने वाले ज़िला मिलापो रुम में सिर्फ़ 2004को ही शिकस्त हुई थी।

बदक़िस्मती से ई अहमद को अपनी ही पार्टी के कैडरस से मुख़ालिफ़त का सामना करना पड़ा था। यूथ लीग वर्कर्स ने 78 साला अहमद की उम्मीदवारी की ये कह कर मुख़ालिफ़त की थी कि वो अलील रहते हैं और उनकी उम्र भी ज़्यादा होरही है। ताहम ई अहमद ने पार्टी क़ियादत पर अपना असर बरक़रार रखा और उम्मीदवार बन गए हैं।

इंतेख़ाबी मुहिम के दौरान उन्होंने यू पी ए हुकूमत के इक़तेदार पर वापिस होने के इमकानात को रोशन बताया है।

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