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उड़ीसा: दलित के साथ भेद भाव, शमशान में नहीं करने दिया अंतिम संस्कार

भुवनेश्वर: ओडिशा के बालासोर में एड्स पीड़ित एक व्यक्ति की मौत के बाद गाँव वालों ने उसको श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं दी. बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति एड्स की बीमारी से पीड़ित था. दलित परिवार के काफी विरोध के बावजूद जब गाँव वाले नहीं माने तो मजबूरन अपने घर के सामने ही चिता जलानी पड़ी. इसपर लोगों का तर्क था कि एड्स पीड़ित को सार्वजनिक तौर पर जलाने से पूरे गांव में रोग फैलने का डर था.

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नेशनल दस्तक के खबरों के मुताबिक, तेंतेई गांव में रहने वाले 35 साल के दलित शख्स की एक हॉस्पिटल में शुक्रवार को मौत हो गई थी. वह मुंबई में मजदूरी करता था, लेकिन एचआईवी पीड़ित होने के बाद कुछ महीने पहले घर लौट आया था.
परिवार वालों ने उसको पहले कटक के एससीबी हॉस्पिटल में एडमिट कराया, लेकिन बाद में फैमिली प्राइवेट हॉस्पिटल ले गई, जहां एक लाख रुपए खर्च आया. लेकिन वह नहीं बच सका. इस मामले में मृतक के भाई का कहना है कि गांववालों की जिद के आगे उसके परिवार को झुकना पड़ा. सोचा नहीं था कि एड्स पीड़ित के साथ ऐसा भेद भाव किया जाता है.
आप को बता दें कि एड्स पीड़ितों से भेदभाव रोकने और अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने HIV एंड एड्स (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) बिल पास किया है. इस के बावजूद, दलित परिवार के साथ भेद भाव पूर्ण व्यवहार किया गया. बताया जाता है कि तहसीलदार शत्रुघ्न सेठी और पुलिस ने भी गांववालों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

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