उत्तर प्रदेश चुनाव में बीएसपी मुसलमानों को ‘कुरआन और हदीस’ का उदाहरण दे रही हैं

उत्तर प्रदेश चुनाव में बीएसपी मुसलमानों को ‘कुरआन और हदीस’ का उदाहरण दे रही हैं
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लखनऊ। बीएसपी प्रमुख मायावती की उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों से आगामी चुनाव में समर्थन देने की सीधी अपील करने के बाद अब पार्टी के कार्यकर्ता कुरान की आयतों और हदीस के उदाहरणों का जिक्र कर मुस्लिम मतदाताओं का एसपी और कांग्रेस से मोहभंग करने की कोशिश कर रहे हैं।

बीएसपी विधायक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के जोनल कोऑर्डिनेटर, अतर सिंह राव ने बुधवार को बहजोई कस्बे में मुस्लिम भाईचारा मीटिंग के लिए जमा हुए मुस्लिमों से कहा, ‘आपका हदीस कहता है कि मुसाफिरों के एक समूह को अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए एक नेता की जरूरत होती है। दलितों ने हदीस की इस शिक्षा का पालन किया है और एकजुट होकर एक नेता और एक बैनर के तले चले हैं। जो समुदाय 5,000 वर्षों तक गुलाम रहा वह आपकी हदीस का पालन कर एक बड़े मुकाम पर पहुंच गया।’

उन्होंने लाल किला और ताजमहल का जिक्र करते हुए कहा कि ये मुस्लिमों की शाही विरासत के सबूत हैं। राव का कहना था, ‘नमाज और जनाजे के लिए आप एक साथ आते हैं, लेकिन वोट के समय बिखर जाते हैं।’ राव खुद एक दलित हैं और वह इन बातों के जरिए मुस्लिमों को 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी के साथ आने का संदेश देने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही वह संभावित ‘नेता’ के तौर पर पार्टी के सबसे कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने मुस्लिमों को याद दिलाया की मायावती की पिछली सरकार के दौरान सिद्दीकी के पास मंत्री के तौर पर 18 पोर्टफोलियो थे और वह सत्ता में एक बड़ी हैसियत रखते थे।

इसके बाद मुस्लिमों के बीच मायावती की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे सिद्दीकी ने कहा, ‘जिस काफिले का कोई रहबर नहीं होता, वह भटक जाता है, लुट जाता है।’ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के बीच बीएसपी की लोकप्रियता बढ़ाने की जिम्मेदारी सिद्दीकी के बेटे अफजल को दी गई है। अफजल यह सुनिश्चित करते हैं कि भाईचारा मीटिंग शुरू होने से पहले कुरान की आयतें पढ़ी जाएं।

सिद्दीकी ने मीटिंग के लिए बड़ी संख्या में जमा हुए मुस्लिमों से कहा कि कांग्रेस और एसपी ने मुस्लिमों का इस्तेमाल अपनी चुनावी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए किया है और ये दल चुनाव के बाद मुस्लिमों से किनारा कर लेते हैं। उन्होंने मीटिंग में मौजूद समुदाय के नेताओं को रिझाने के लिए मुस्लिमों के लिए मायावती सरकार की ओर से किए गए कार्यों की भी याद दिलाई।

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