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उमर अबदुल्लाह की मनमोहन सिंह और चिदम़्बरम से मुलाक़ात

नई दिल्ली 15 नवंबर (पी टी आई) मुसल्लह अफ़्वाज को ख़ुसूसी इख़्तयारात क़ानून से जुज़वी दसतबरदारी के मसला पर जारी तनाज़ा के दौरान चीफ़ मिनिस्टर जम्मू-कश्मीर उमर् अबदुल्लाह ने आज कहा कि इस मुआमले में मुसल्लह अफ़्वाज की तशवीश को दूर करने के

नई दिल्ली 15 नवंबर (पी टी आई) मुसल्लह अफ़्वाज को ख़ुसूसी इख़्तयारात क़ानून से जुज़वी दसतबरदारी के मसला पर जारी तनाज़ा के दौरान चीफ़ मिनिस्टर जम्मू-कश्मीर उमर् अबदुल्लाह ने आज कहा कि इस मुआमले में मुसल्लह अफ़्वाज की तशवीश को दूर करने के कई मवाक़े मौजूद हैं।

उन्हों ने इस क़ानून की तंसीख़ के मौक़िफ़ पर क़ायम रहने का इआदा किया और कहा कि वो मुजव्वज़ा मंसूबा पर अमल आवरी के ख़ाहां हैं। उमर् अबदुल्लाह ने आज यहां वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम से मुलाक़ात करके रियासत के कुछ हिस्सों से मुसल्लह अफ़्वाज ख़ुसूसी इख़्तयारात ऐक्ट हटा लेने की अपनी तजवीज़ पर तबादला-ए-ख़्याल किया।

मिस्टर अबदुल्लाह ने इस मीटिंग के बाद अख़बारनवीसों को बताया कि वज़ीर-ए-आज़म और वज़ीर-ए-दाख़िला ने उन की तजवीज़ को तवज्जा के साथ सुना।क़ब्लअज़ीं कल मिस्टर अबदुल्लाह ने वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी से मुलाक़ात की थी।

उन्होंने बताया कि वज़ीर-ए-आज़म और सीनीयर वुज़रा से उन की मुलाक़ातों का मक़सद इस मौज़ू पर इख़तिलाफ़ को दूर करना है।हुक्मराँ नैशनल कान्फ़्रैंस और सब से बड़ी अप्पोज़ीशन पार्टी, पीपल्स् डैमोक्रेटिक पार्टी (पी डी पी)मुसल्लह अफ़्वाज ख़ुसूसी इख़्तयारात ऐक्ट के ख़ातमा के हक़ में हैं जबकि कांग्रेस का ये कहना है कि मिस्टर अबदुल्लाह ने तजवीज़ पेश करने से पहले इस से सलाह मश्वरा नहीं किया था।

उन्हों ने आज वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और वज़ीर-ए-दाख़िला चिदम़्बरम पर वाज़िह किया कि वो क़ौमी सलामती पर सयासी तिजारत नहीं कररहे हैं और ना मुस्तक़बिल में कभी ऐसा करेंगी। उम्र अबदुल्लाह ने इस मसला पर जारी शदीद इख़तिलाफ़ात के दौरान ये मुलाक़ात की।

उन्हों ने मुतनाज़ा क़ानून को रियासत के बाअज़ हिस्सों से मंसूख़ करने की परज़ोर मुदाफ़अत की। उम्र अबदुल्लाह, वज़ीर फ़ीनानस परनब मुकर्जी से मुलाक़ात करने वाले हैं। बादअज़ां उन्हों ने अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि इस मसला पर मुसल्लह फ़ोर्स की तशवीश दूर करने के कई मवाक़े मौजूद हैं और हमें इस मुआमले में आगे बढ़ना चाहीयॆ। वाज़िह रहे कि तक़रीबन एक साल क़बल का बीनी कमेटी बराए सलामती ने इस की सिफ़ारिश की थी।

उमर् अबदुल्लाह ने कहा कि वो इस मसला पर इत्तिफ़ाक़ राय पैदा करने केलिए का बीनी कमेटी बराए सलामती के अरकान से मुलाक़ात कररहे हैं। उन्हों ने कहा कि इस मुलाक़ात का मक़सद इख़तिलाफ़ात ख़तम् करना है। वज़ीर-ए-आज़म और मर्कज़ी वुज़रा की जानिब से किसी तीक़न के बारे में पूछे जाने पर उम्र अबदुल्लाह ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना मुनासिब नहीं होगा।

वो किसी और की जानिब से बात नहीं करसकती। उन्हों ने अपना नुक़्ता-ए-नज़र वाज़िह तौर पर पेश करदिया है और वो समझते हैं कि हक़ीक़ी मक़सद से वज़ीर-ए-आज़म और वज़ीर-ए-दाख़िला वाक़िफ़ होचुके हैं।

ये एक जारीया अमल है और बहुत जल्द किसी मुसबत फ़ैसला की तवक़्क़ो की जा सकती है। इस दौरान वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी ने कहा कि इस क़ानून की तंसीख़ हस्सास मुआमला है जिस से बाशऊर अंदाज़ में निमटने की ज़रूरत है। उमर् अबदुल्लाह ने ए के अनटोनी से कल मुलाक़ात की थी। अनटोनी ने बताया कि चीफ़ मिनिस्टर के साथ उन की बातचीत बिलकुल वाज़िह और बामक़सद रही ताहम ये ग़ैर मुख़्ततम थी। वज़ारत-ए-दिफ़ा और फ़ौज AFSPA के ताल्लुक़ से तशवीश का शिकार है जबकि वज़ारत-ए-दाख़िला इस क़ानून की दसतबरदारी के हक़ में है।

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