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उमर से केंद्र नाराज़

नई दिल्ली, 12 फरवरी: गुनहगार अफजल गुरू की फांसी को लेकर जम्मू कश्मीर के वज़ीर ए आला उमर अब्दुल्ला के उठाए सवालों को मरकज़ी हुकूमत ने खारिज कर दिया है।

नई दिल्ली, 12 फरवरी: गुनहगार अफजल गुरू की फांसी को लेकर जम्मू कश्मीर के वज़ीर ए आला उमर अब्दुल्ला के उठाए सवालों को मरकज़ी हुकूमत ने खारिज कर दिया है।

वज़ीर ए दाखिला सुशील कुमार शिंदे ने साफ कहा कि आइन (संविधान) के तहत पूरी कानूनी अमलसे अफजल को फांसी दी गई। अजमल कसाब की तरह अफजल की फांसी को हसास के लिहाज से खुफिया रखा गया और इसमें कानून की कहीं अनदेखी नहीं हुई।

वज़ीर ए दाखिला ने फांसी को सयासी फैसला बताए जाने के इल्ज़ाम को भी सिरे से नकार दिया। शिंदे ने साथ ही कहा कि अगर अफजल के रिश्तेदार तिहाड़ में उस जगह पर जाने के लिए गुजारिश करेंगे जहां अफजल को दफनाया गया तो हुकूमत उस पर गौर करेगी। अफजल को राजीव गांधी के कातिलो से पहले फांसी देने को लेकर लग रहे इल्ज़ामो को भी हुकूमत ने खारिज किया है।

शिंदे ने कहा कि राजीव गांधी और बेअंत सिंह के कातिलो का मामला अफजल के मामले से अलग है। ये मामले अब भी कोर्ट में ज़ेर ए गौर हैं। शिंदे ने इन इल्ज़ामो को गलत बताया कि हुकूमत ने अफजल के घर वालो को फांसी देने के फैसले से वाक़िफ नहीं कराया। उन्होंने कहा कि घर वालों को स्पीड पोस्ट के जरिए इत्तेला भेजी गई थी। जम्मू कश्मीर के वज़ीर ए आला को भी पहले ही इत्तेला दी गई थी।

जब उनसे पूछा गया कि स्पीड पोस्ट घर वालों के पास वक्त पर नहीं पहुंचा तो शिंदे ने कहा कि सारे काम वज़ीर ए दाखिला नहीं कर सकता। उन्होंने सिर्फ इस इत्तेला पर दस्तखत किए थे। स्पीड पोस्ट जेल इंताज़ामिया रवाना करता है। शिंदे ने माना कि मामले में प्राइवेसी बरती गई। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह काम खुलेआम होता तो कुछ दिक्कतें हो सकती थीं।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी उमर की बात को गलत बताया है। कांग्रेस तर्जुमान संदीप दीक्षित ने कहा कि वज़ीर ए दाखिला ने जम्मू कश्मीर के हालात के मद्देनजर कुछ बातें कही है। लेकिन हुकूमत का फैसला ( फांसी देने का) बिलकुल सही था। गौरतलब है कि उमर ने अफजल की फांसी को लेकर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि हुकूमत को साबित करना होगा कि उसका यह फैसला सयासी नहीं बल्कि कानूनी है। उमर ने यह भी कहा था कि मरकज़ी कुकूमत को ऐसे मुम्ज़िमीन के बारे में सवालों का जवाब देना होगा, जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। उमर ने राजीव गांधी और बेअंत सिंह के मामले का हवाला दिया था।

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