Friday , November 24 2017
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उरी हमले पर देश के लोगों में गुस्सा, मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती

देश की जनता सरकार से किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है. ऐसे में ढाई साल पहले आतंकवाद और पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के वादे के साथ सत्ता में आई केंद्र की मोदी सरकार के सामने क्या विकल्प हैं? क्या पाकिस्तान सरकार से बातचीत की जानी चाहिए या फिर पाकिस्तान पर हमला किया जाए?
उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले को लेकर नई दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है. पाकिस्तान की सीमा से दाखि‍ल हुए आतंकियों के हमले में 17 जवानों की शहादत को लेकर देशवासियों की आंखे नम हैं. लोगों के बीच गुस्सा भी है.सियासी हुक्मरान निंदा और बयानबाजी कर रहे हैं मगर देश की जनता कोई ठोस कार्रवाई चाहती है। हालांकि इन विकल्पों के साथ जोखिम भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जैसा हमला अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए किया था, भारत के पास भी विकल्प है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे आतंकी कैंपों पर हमले किए जाए. हालांकि, इसका सबसे बड़ा रिस्क है कि पड़ोसी देश के साथ एक और जंग छिड़ सकती है और यह पड़ोसी परमाणु हथियार से लैस है.
जून 2015 में मणि‍पुर में घात लगाकर किए गए हमले में सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद भारतीय सेना म्यांमार की सीमा में दाखिल हो गई और आतंकियों को मार गिराया गया. भारत पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों के खि‍लाफ इस तरह के विकल्प पर भी विचार कर सकता है लेकिन पाकिस्तान के हालात म्यांमार से अलग हैं और पाकिस्तान के खिलाफ कभी ऐसा किया नहीं किया गया है.
भारत पाकिस्तान को आतंकी देश घोषि‍त कर विश्व बिरादरी में अलग-थलग किए जाने की एक और कोशि‍श कर सकता है. भारत हालांकि दशकों से इस तरह की कोशिश कर रहा है लेकिन इस दिशा में बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. अब चूंकि आतंकवाद एक वैश्विक खतरे के तौर पर उभरा है, ऐसे में भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर फायदा होने की गुंजाइश है

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