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आने वाले हैं ‘उर्दू के अच्छे दिन’; समारोहों में दिखने लगे हैं आरएसएस नेता

नई दिल्ली: देश का बहुरंगी सामाजिक तानाबाना तबाह कर इसे भगवा रंग देने की कोशिश कर रही आरएसएस की आँख अब देश की सबसे पुरानी भाषाओँ में से उर्दू को ख़त्म करने टिकी हुई है।

यह कहना है देश में उर्दू के प्रचार और प्रसार में जुटी दिल्ली की एक संस्था उर्दू डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन का जिसने हाल ही में एनसीपीयूएल यानि नेशनल कौंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ़ उर्दू लैंग्वेज और ख़ास तौर पर इस कौंसिल के डायरेक्टर पर आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार को इस कार्यक्रम में बुलाने के लिए फटकार लगाई है। मामला है कुछ दिन पहले का जब एनसीपीयूएल ने ‘द रोडमैप फॉर प्रमोशन ऑफ़ उर्दू, पर्शिअन एंड अरेबिक’ नाम के सेमिनार में आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार को बतौर चीफ गेस्ट निमंत्रित किया।

संस्था के जनरल सेक्रेटरी डॉ. लाल बहादुर ने प्रोग्राम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रोग्राम में आने पर इंद्रेश कुमार जोकि आरएसएस के हाथ की कठपुतली के तौर पर जाने जाते हैं ने उर्दू भाषा के बारे में बात करने की बजाये सेमिनार में मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुद्दे पर बात करनी शुरू कर दी और इस्लाम में औरतों के हालातों की बात कर इस्लाम की निंदा करनी शुरू कर दी।

आरएसएस लीडर के बारे में अगर बात करें तो इंद्रेश कुमार का नाम अजमेर दरगाह और समझौता एक्सप्रेस बम धमाकों से जुड़ा हुआ है। इस समारोह में ऐसे शख्श को बतौर चीफगेस्ट बुलाना अपने आप में सवाल खड़े करता है। और तो और इंद्रेश कुमार के पास न तो इस भाषा और न ही इस कार्यक्षेत्र से जुड़ा किसी तरह का कोई तजुर्बा है और न ही ऐसी कोई उपलब्धि जिसकी वजह से उन्हें बतौर चीफ गेस्ट बुलाया जा सके।

ऐसे में उन्हें बतौर चीफ गेस्ट बुलाने के पीछे एनसीपीयूएल डायरेक्टर की आरएसएस के प्रति वफादारी भरी भावना साफ़ दिखाई दे रही है। चंद लफ़्ज़ों में कहें तो: “बाड़ खेत को खाने की तैयारी में है।

 

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