इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर की अपील, उर्दू के चाहनेवालों मदद कीजिए!

इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर की अपील, उर्दू के चाहनेवालों मदद कीजिए!

नई दिल्ली : उर्दू जाननेवाले मित्रों के लिए विशेष ध्यानार्थ. वे अपने साथियों तक यह संदेश जरूर पहुंचायें. उर्दू पत्रकारिता पर तो बात ही नहीं होती कभी, जबकि अलहिलाल से लेकर बाद तक में उसका शानदार इतिहास और योगदान रहा है. अपने फेसबुक वॉल पर ये संदेश लिखने, शेयर और टैग करने वाले हैं वरिष्ठ पत्रकार निराला जो एक घुमंतू पत्रकार भी हैं यानी खोजी पत्रकार जो उर्दू बचाने के लिए अपने फेसबुक वॉल पर अपने कुछ उर्दू दोस्तों और करीबी पहचान वालों को टैग कर रहे हैं, जबकि वो भोजपुरी मिजाज वाले हैं।
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यही नहीं, बल्कि आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान ने इस कोर्स के लिए मदद की अपील की है। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, ‘उर्दू के चाहने वालो मदद कीजिए। आप या आपके कोई जानकार नौजवान दोस्त उर्दू पत्रकारिता में डिप्लोमा करना चाहते हैं तो आईआईएमसी ने एक मौका मुहैया कराया है। दाखिले के लिए फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 29 जुलाई है।’

बताते चलें कि उर्दू भाषा हिन्द आर्य भाषा है। उर्दू भाषा हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप मानी जाती है। उर्दू में संस्कृत के तत्सम शब्द न्यून हैं और अरबी-फ़ारसी और संस्कृत से तद्भव शब्द अधिक हैं। ये मुख्यतः दक्षिण एशिया में बोली जाती है। यह भारत की शासकीय भाषाओं में से एक है तथा पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। इस के अतिरिक्त भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर की मुख्य प्रशासनिक भाषा है। साथ ही तेलंगाना, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त शासकीय भाषा है।

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